शादी ब्याह

शादी ब्याह

"परंपरा यानि किसी भी विचार का श्रृंखलाबद्ध तरीके से अनुकरण" विश्व में अनेकों देश और सबकी अलग और अनूठी परंपराएं..!
परन्तु जब परंपरा की बात हो तो भारत देश दुनियाभर में आज भी विख्यात है। कोई भी सभ्यता जब अपने अस्तित्व की चमक बिखेर रही होती है तब उस सभ्यता की संस्कृति और परंपरा का उसमें महत्वपूर्ण योगदान होता है..अगर हम हड़प्पा या सिन्धु सभ्यता की बात करते हैं तो उससे संबंधित संस्कृति और परंपरा का उल्लेख छुए बिना नहीं रह पाते..क्योंकि किसी भी संस्कृति को संजोकर रखने वाली व्यवस्था का नाम ही परंपरा है...!!!!!

भारत में हर उत्सव, समारोह, कार्यक्रम, तीज - त्यौहार आदि को परंपरागत तरीके से मनाने का रिवाज़ है। 
चाहे फसल की कटाई - उगाई हो..!!
चाहे बच्चे का नामकरण हो या शिक्षा प्राप्ति का सफ़र..!!
महिला की माहवारी हो या गोद भराई..!!
घर की नींव डालनी हो या गृह प्रवेश का मुहूर्त..!!
लड़का लड़की की सगाई हो या शादी - ब्याह का कार्य.!!
बेटी की जन्म हो या उसकी विदाई.!!
गुरु शिष्य संबंध का श्रीगणेश.!!!
हर कार्य को परंपरागत ढंग से अनुकरण करना इस देश की परम्परा है.!!!!

शादी ब्याह एक ऐसी परंपरा है जिसका रूप भले ही बदला हो परन्तु परंपरा आज भी बदस्तूर जारी है.!!

ये एक ऐसी परंपरा है जिसमें न सिर्फ दो लोग एक रिश्ते में बंध रहे होते हैं वरन् दो परिवार सामाजिक सामंजस्य स्थापित कर रहे होते हैं। 

विविधताओं से सुसज्जित भारत देश में विवाह की परंपरा भी विस्तृत है..हर भाषा - भाषी, जाति और धर्म के लोग अपने अपने पारंपरिक तरीकों से इस अधिष्ठान को पूर्ण करते हैं।

यहां की मिट्टी में पला बड़ा हर लड़का या लड़की अपनी शादी के परंपरागत अनुष्ठान के सपने सजाते हैं..!शादी का ये अनोखा अनुष्ठान परंपरागत मुहूर्त से शुरू होकर सारे रीति रिवाजों के साथ संपन्न किया जाता है..!जो दूर दराज के रिश्तेदार बरसों एक दूसरे से मिले नहीं होते वे इस मौके पर सम्मिलित होते हैं.!बुआ, मौसियों, चाची, ताईयों का अनोखा संगम इन उत्सवों में देखने को मिलता है..!
और रस्मों के तो कहने ही क्या.?

लड़के की शादी हो तो अलग रस्में और लड़की की शादी तो अलग..!हल्दी की रस्म जिसमें लड़का लड़की को उसके रिश्तेदार हल्दी लगाकर आशीर्वाद देते हैं ताकि किसी की बुरी नजर न लगे..और पूरे विवाह में हल्दी के उबटन से उनकी देह भी स्वस्थ रहे..!

मेंहदी की रस्म - आजकल मेंहदी की रस्म को भी खूब गाजे बाजे के साथ संपन्न किया जाता है मेंहदी सुहाग की निशानी होती है इसलिए वर और वधू दोनों को ही लगाई जाती है..! इसका नेग भी भाभी,चाचियों को दिया जाता है..!

महिला संगीत - विवाह में गाना बजाना न हो तो विवाह उत्सव अधूरा सा लगता है.. आजकल संगीत संध्या के लिए महीनों से तैयारियां की जाने लगी हैं..!बारात ले जाने की परंपरा ..!दावत की परंपरा..!

बेटी के हाथ पीले करने की या कन्यादान की परंपरा .....हर शब्द पर मेरा हृदय पिघल रहा है.. यहां बेटी की विदाई..!!!!
और वहां बहू का स्वागत.. से लेकर सम्पूर्ण विवाह एक परंपरागत तरीके से संपन्न किया जाता है..!  

विवाह का अनुष्ठान जितना खूबसूरत होता है उतनी दुखदाई इसकी और एक परंपरा है और वोह है दहेज प्रथा .. लेन देन..
विवाह जैसी खूबसूरत परंपरा पर ये प्रथा चांद पर दाग समान है..! जब दो लोग एक संबंध में जुड़ने के लिए तन मन से तैयार हों तब धन या दहेज जैसी कुरीति इस संबंध के मोल को कम कर देती है और विवाह व्यवस्था अपना मूल्य खोने लगती है..!

हंसी खुशी, रीति रिवाजों, प्रथाओं, रस्मों की परंपरा होती है शादी..!!!! ये एक ऐसी परंपरा है जिसके संपन्न होने के सपने सिर्फ़ एक व्यक्ति विशेष के न होकर पूरे परिवार व रिश्तेदारों के भी बन जाते हैं..! शादी ब्याह एक खूबसूरत परंपरा है जिसे हर वर्ग अपनी सहूलियत से संपन्न कर सकता है..अगर कुछ कुरीतियों को इससे अलग कर दिया जाए तो ये उत्सव धूम धाम, प्रेम और आपसी सामंजस्य से पूरा किया जा सकता है..! 

इसमें बंधने वाले नव जोड़े को सुखपूर्वक ज़िन्दगी बसर करने का  आशीर्वाद देकर सभी सगे संबंधी अपना कर्तव्य निभाएं। इस खूबसूरत परंपरा को बदस्तूर जारी रखने के लिए जरूरी है इसके पीछे की संगीनता की समझ।तो आइए अपना कर्तव्य निभाएं और इस परंपरा की अहमियत से सभी को अवगत कराएं।

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