श्रीकृष्ण की 5 मनमोहक लीलाएं- Blog post by Priyanka Daksh

श्रीकृष्ण की 5 मनमोहक लीलाएं- Blog post by Priyanka Daksh

 "जय श्री कृष्णा "


"ओं कान्हा अब तो मुरली की,

 मधुर सुना दो तान

मैं हूं तेरी प्रेम दीवानी मुझको लो पहचान,

ओं कान्हा अब लो तो मुरली की, मधुर सुना दो तान "


"देवकी पुत्र यशोदा ना नंदलाला, वो कजरारी अखियाँ, मनमोहक रूप,और प्यारी छवि जो सबको अपनी और आकर्षित कर लें ऐसे कृष्णा कन्हैया, मुरली वाले का वर्णन और गुणगान इस संसार का हर कोई प्राणी करता हैं ",जब कारावास में कृष्णा माता देवकी और वासुदेव के यहां जन्मे तो उनके मामा कंस के ना चाहते हुए भी कृष्णा दूर नंदगाव में यशोदा और नन्द बाबा के यहां पले बड़े, मां यशोदा ने उनका पालन पोषण किया ".बचपन से हीं कान्हा बहुत शरारती थे, और हम आज उनकी कुछ बाल लीलाओं का वर्णन आपके लिए लाये हैं-



1- भगवान कृष्ण ने सबसे पहले पुतना का वध किया, कंस के कहने पर पुतना श्रीकृष्ण को स्तनपान के जरिए विष देकर मार देना चाहती थी. पुतना कृष्ण को विषपान कराने के लिए एक सुंदर स्त्री का रूप धारण कान्हा के पास पहुंची. मौका पाकर पुतना ने पालने में खेल रहे कृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी. श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पुतना का वध कर दिया.


2- कान्हा बचपन में बहुत ही शरारती थे,कई बार माता यशोदा श्रीकृष्ण की शरारतों से परेशान हो जाती थीं. एक बार जब ये अधिक परेशान हों गईं तो उन्होंने कृष्ण को ऊखल से बांध दिया. जब माता यशोदा घर के दूसरों कामों में व्यस्त हो गई तब कृष्ण ऊखल को ही खींचने लगे. वहां आंगन में दो बड़े-बड़े वृक्ष भी लगे हुए थे, कृष्ण ने उन दोनों वृक्षों के बीच में ऊखल फंसा दिया और जोर लगाकर खींच दिया.


ऐसा करते ही दोनों वृक्ष जड़ सहित उखड़ गए. वृक्षों के उखड़ते ही उनमें से दो यक्ष प्रकट हुए, जिन्हें यमलार्जुन के नाम से जाना जाता था. ये दोनों यक्ष पूर्व जन्म कुबेर के पुत्र नलकूबर और मणिग्रीव थे. इन दोनों ने एक बार देवर्षि नारद का अपमान कर दिया था. इस कारण देवर्षि ने इन्हें वृक्ष बनने का शाप दे दिया. जिस बाल लीला के दौरान श्रीकृष्ण ने वृक्षों को उखाड़कर इन दोनों यक्षों को मुक्ति प्रदान की.


3- एक बार तो खेलते खेलते कान्हा ने मिट्टी खा लीं और जब बलराम से यशोदा मैया से शिकायत की तो, मैया ने कृष्णा का मुंह खुलवाया और उस दिन यशोदा मैया ने पुरे ब्राह्मण के दर्शन कृष्णा के मुंह में हीं कर लिए थे ". जा मैया को यकीन नहीं हुआ तब नन्द बाबा ने कहा" ये सब हमारे बेटे की लीला हैं".


4- सबकी मटकी फोड़ना चुपके से माखन चुरा कर खाना तो उनकी आदतों में शामिल था,कृष्णा बचपन से ही नटखट थे. जितना यशोदा मैया और नंद बाबा उनके नटखट अंदाज से परेशान थे, उतना ही वहां के गांव वाले भी. कृष्ण जी अपने मित्रों के साथ मिलकर गांव वालों का माखन चुरा कर खा जाते थे, जिसके बाद गांव वाले उनकी शिकायत मैया यशोदा के पास लेकर पहुंच जाते थे. इस वजह से उन्हें अपनी मैया से डांट भी खानी पड़ती थी.


5- एक बार श्री कृष्ण अपने मित्रों के साथ यमुना नदी के किनारे गेंद से खेल रहे थे,अचानक गेंद युमना नदी में चली गई और बाल गोपल के सारे मित्रों ने मिलकर उन्हें ही नदी से गेंद लाने को भेज दिया. बाल गोपाल भी एकदम से कदम्ब के पेड़ पर चढ़ कर यमुना में कूद गए. वहां उन्हें कालिया नाग मिला. श्री कृष्ण ने अपने भाई बलराम के साथ मिलकर जहरीले कालिया नाग का वध कर दिया.


6- गोवर्धन पर्वत की कहानी से भी हर कोई परिचित है. जो कि उनकी प्रचलित लीलाओं में से एक है. दरअसल, इंद्र देव श्री कृष्ण की लीलाओं से अंजान ते और उन्होंने गुस्से में गांव में बहुत तेज बारिश कर दी. गांव वालों को बचाने के लिए श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली पर उठा लिया और सबी मथुरावासियों को उसके नीचे शरण दे दी. सात दिन तक बिना कुछ खाए श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को उटाए खड़े रहे और आठवें दिन बारिश रुकने पर गांववासियों को बाहर निकाला. कार्तिक मास में अन्नकुट की पूजा भी श्री कृष्ण ने ही आरंभ कराई थी.


कान्हा की जितनी लीलाओं क वर्णन करुँ कम हैं, लिखती भी जाऊं तो भी खत्म नहीं होंगी, अपनी इन्हीं लीलाओं से सबका मन मोह लेने वाले कृष्णा को मेरी और से सत सत नमन ?.


"जय श्री कृष्णा "

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