एक प्रेरणा शारदा शर्मा

एक प्रेरणा शारदा शर्मा

एक जज्बा होना चाहिए कुछ कर गुजरने का,
उम्र भला रोक पाती है कहाँ हौंसलों की उड़ान को ,

जी हाँ यहीं जज्बा है श्रीमती शारदा शर्मा जी का।  72 वर्षीय शारदा जी मिसाल बन गई है समाज में।  हरियाणा प्रांत के यमुनानगर जिले में साढौरा  नाम से एक छोटा सा शहर है और शारदा जी वहीं की रहने वाली हैं और स्वास्थ्य विभाग से सेवा निवृत है।आइए जानते हैं शारदा जी के विषय में कुछ रोचक और हैरान कर देने वाली बातें। 

किसी के अंधियारे जीवन में रोशनी भर सकें ऐसी इच्छा के साथ उन्होंने मरणोपरांत अपनी आँखे दान करने का निर्णय लिया और फिर सोचा कि मरणोपरांत ये शरीर किस काम आएगा, राख ही तो बनेगी तो क्यूँ ना किसी मरीज के काम आये या चिकित्सा परिक्षण के काम आए और यही सोचकर उन्होंने मरणोपरांत शरीर को भी दान करने का फैसला कर लिया। 

समाज के लिए प्रेरणा बन चुकी शारदा जी साल में तीन तीन बार रक्त दान करके , अब तक 51 बार रक्त दान कर चुकी है।  वह कस्बे की सभी सामाजिक संस्थाओं से जुडी हैं, दान पुण्य करती रहती हैं। लॉक-डाउन जैसे मुश्किल समय में भी शारदा जी यथासंभव समाज की सहायता के लिए आगे आई ।  

अपनी धार्मिक आस्था के चलते शारदा जी अब तक चारो धाम, बारह ज्योतिर्लिंग और मंदिर हो या गुरुद्वारा लेकिन ज्यादातर सभी प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों की वह यात्रा कर चुकी हैं। 101 बार वैष्णो माता भवन में दर्शन के लिए होकर आई हैं।  बर्फीली, दुर्गम पहाड़ियों के बीच में पैदल 31 बार अमरनाथ यात्रा कर चुकी है और बाबा अमरनाथ के पवित्र स्थल को तो वो अपना घर ही मानती हैं। 

धार्मिक स्थलों की यात्रा की इच्छा या कहिये कि जूनून, जो उन्हें भगवान शिव शंकर के निवास स्थान कैलाश मानसरोवर तक ले गया। आपको ज्ञात ही होगा कि कैलाश मान सरोवर तक जाने का रास्ता हिमालय की चोटियों से होकर निकलता है और जहाँ यदा कदा मौसम के बिगड़ने का डर भी बना रहता है, लेकिन अगर हौंसले बुलंद हों तो क्या फर्क पड़ता है कि कितनी चुनातियाँ रास्ते में आएं ।

ईश्वर के प्रति यह उनका प्रेम ही है जो उन्हें बांग्लादेश, पाकिस्तान , चीन एवं श्रीलंका भी ले गया। पाकिस्तान में ननकाना साहिब गुरुद्वारा , नेपाल में श्री पशुपति नाथ , चीन के कैलाश मानसरोवर और साथ ही साथ श्रीलंका के धार्मिक स्थलों की भी उन्होंने यात्रा की । 
उनका सामाजिक रुतबा, सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं से जुड़ाव, जन कल्याण की भावना और समाज कल्याण में योगदान के लिए उन्हें विभिन्न संस्थाओं के द्वारा सम्मानित किया गया है।   

बढ़ती उम्र के साथ कुछ शारीरिक समस्याएं भी आने लगती है लेकिन उनका हौंसला और इच्छाशक्ति अभी भी उतना ही प्रबल है और शारदा जी अपनी इच्छा बताती है कि उनकी जान भी किसी धार्मिक स्थल पर ही सेवा करते हुए निकले। 

शारदा जी प्रेरणा, इच्छा शक्ति , हिम्मत और हौंसले  की जीती जागती मूर्त हैं , हम ईश्वर से उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन के लिए प्रार्थना करते हैं।

मधु धीमान

What's Your Reaction?

like
1
dislike
0
love
1
funny
0
angry
1
sad
0
wow
2