शादी के मायने: प्यारी दुल्हनिया के नाम पाती

शादी के मायने: प्यारी दुल्हनिया के नाम पाती

प्यारी दुल्हनिया,


शादी मुबारक, पर एई बिटिया जानती हो ये बंधन बहुत नाजुक होता है? चुटकी सिंदूर और मंगलसूत्र महज़ शृंगार के साधन नहीं, दो आत्माओं को एक सूत्र में बांधने वाली वो मजबूत डोर है जिसे सात जन्मों का बंधन कहते है। तैयार हो जा बिटिया अपने सपनो को पर लगाकर पियु का हाथ थामें तुझे बेटी से बहू का सफ़र तय करना है।


महियर की मिट्टी से उठ गया दाना-पानी अब हल्दी, मेहंदी, संगीत, जयमाला, हस्त मिलाप, फेरे और बिदाई बस इतने पायदान सर करते ही अपने वजूद को एक अन्जान के हाथों सौंप कर खुद को ससुराल के आँगन में बो देना है। माँ बाप के संस्कारों की नमी को दूसरे गोत्र में सिंचकर ससुराल के वट वृक्ष को आगे बढ़ाना है।


हल्दी कहती है हंमेशा पीले सोने सी हंसी को मुखड़े पर मलकर हंसती रहना, खुशी को अपनी सहेली बनाकर ससुराल में शामिल रहना। मेहंदी की महक उठती है जैसे हाथों की लकीरों पर, वैसे ही पियु के जीवन में अपनी चाहत के रंग भरना। संगीत से सरगम चुराकर जीवन की तान को सजाते गुनगुनाते रहना। नग्मों की महफ़िल है ज़िंदगी, हाथ थामें पति का परिवार को गले लगाना। जयमाला के फूलों से बस इतना ही सीखना खुशबू फैलाते हरसू हर नज़ारा जवाँ है रखना। जयमाला पहनाकर पति का अपने नये जीवन में स्वागत करना। हस्त मिलाप के वक्त अपनी नाजुक हथेली एक मजबूत और महफ़ूज़ हाथों में सौंपते हुए महसूस करना, जैसे शिव पार्वती और राम सीता के हस्त का संगम हो रहा है।


अहं को पीहर की चौखट पर ही छोड़ देना, संपूर्ण समर्पित भाव से पलकें झुकाकर नये बंधन का स्वागत करना। अग्नि को साक्षी मानकर सात फ़ेरे की रस्म अदायगी करते सातों वचन सर चढ़ाते आख़री फेरे में आगे रहना है, ये प्रतिक है उस बात का कि पति के हर फैसले में उसका साथ देते पीछे रहना है, पर मौत को मात देते आख़िर में पति के हिस्से के दु:ख और मौत को आगे आकर गले लगाना है। सिंदूर के लाल रंग से प्रकाशित करनी है ज़िंदगी की लौ, हर कोरे रंग में अपनी चाहत का रंग भरते पति की दुनिया में रौनक भरनी है। काले मनके का बंधन गले को छूते ही बंध जाना है पति की किस्मत से अपना नसीब जोड़ते एकसूत्र में बंधे जाना है। सुख दु:ख संग-संग झेलते ताउम्र साथ निभाना है।

तू सारी रस्मों को समझते हंसी खुशी निभा लेगी, पर बेटी बिदाई की बेला बड़ी दु:खदायी है। छुट जाता है माँ का आँचल और परछाई पिता की पीछे छूट जाती है। भाई बहन से अठखेलियों का नाता टूट जाता है, सखी सहेली और बाबुल का आँगन धरा का धरा रह जाता है। एक नई दुनिया का सामना तुझे अकेले ही करना होता है।


हाँ शादी के बाद पहला इवेंट आएगा \"हनीमून\" इन लम्हों को तुम्हें भरपूर जीना है। कुछ दिनों की नज़दीकियों में तुम्हें पति की शख़्सीयत को जान लेना है, समझ लेना है। इन अमूल्य लम्हों में खुद को नखशिख पति के आगे पूरी तरह से खोल देना है, पति की नस नस में अपनी चाहत को घोल देना है। तो ज़िंदगी का नया अध्याय मुबारक हो। शादी का ये बंधन तो प्यार का बंधन है, जन्मों का संगम है। सोच ले क्या ढ़ल पाएगी एक ऐसे सांचे में जिनके आकार से तू अंजान है? डरो मत, हर लड़की के भीतर उपर वाले ने एक हुनर दिया है तभी तो पल भर में महियर की माया छोड़ कर ससुराल को अपना बना लेती है। ये एक लड़की ही कर सकती है।


भावना ठाकर \"भावु\" (बेंगुलूरु, कर्नाटक)#वेडिंगसिज़न

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