श्रीमद् भगवद् गीता की तीन अनमोल सीख

श्रीमद् भगवद् गीता की तीन अनमोल सीख

प्यारी सखियोंआज मैंने जो विषय उठाया है वह है 'श्रीमद् भगवद् गीता' जी हाँ .. हिंदू धर्म के सबसे अधिक माननीय और लोकप्रिय शास्त्रों में से एक। महाभारत का ही एक हिस्सा है 'गीता' 

एक परेशान और व्याकुल योद्धा अर्जुन और उनके साथ श्री कृष्ण के बीच का संवाद है यह। इस लेख में श्री कृष्ण अर्जुन की परेशानी मिटाने के लिए उन्हें कुछ इस प्रकार सलाह देते हैं कि मानो वे ना सिर्फ़ अर्जुन को बल्कि हम सब को भी समझा रहे हों और हम सबको जीने का ढंग बता रहे हों। 

गीता एक ऐसी किताब है जो जीवन के रास्ते से भटक जाने वाले लोगों को जीने का सही पथ  दिखाती है। व्याकुल और परेशान व्यक्तियों को स्पष्टता प्रदान करती है और दुनिया के प्रत्येक इंसान को बुद्धिमता और सूझबूझ सिखाती है । 

गीता के इस ज्ञान को कुछ लेखों द्वारा पिरोने का प्रयास किया गया है और इसके माध्यम से आप सब को लाभान्वित करने का प्रयास किया गया है । 

चलिए आइए गीता के भावार्थ - निचोड़ को कुछ लेखों द्वारा समझते हैं- 

1-समय का महत्तव समझें और आगे बढ़ें

गीता में अर्जुन और श्री कृष्ण के संवादों में श्रीकृष्ण ने सबसे पहले समय का महत्व बताते हुए कहा है कि इस दुनिया में सबसे कीमती और बहुमूल्य कोई धन और दौलत नहीं बल्कि समय है क्योंकि खोया हुआ धन तो मेहनत और परिश्रम से वापस मिल सकता है परंतु बीता हुआ समय नहीं । यह वह खजाना है जो किसी भी व्यक्ति को पल में शक्तिशाली और पल में ही कमजोर बना सकता है । हमारा जीवन समय के साथ बँधा है यानि न तो हम अपने अतीत में कुछ बदल सकते हैं और ना ही भविष्य को देख सकते हैं । हमारे हाथों में केवल और केवल हमारा वर्तमान है यानि वर्तमान का यह पल जिसे हम जी रहे हैं । उसे हम या तो बीती बातों का दुख मनाते हुए बिता दें यानि बर्बाद कर दें या फिर भविष्य की चिंता अर्थात बेचैनी में समय व्यतीत करते हुए और आने वाले समय की इंतजार में बैठे रह कर बिता दें । इस प्रकार निरंतर चलने वाला समय वर्तमान को भी अतीत में बदल देगा । इसलिए जिंदगी में कुछ भी करने के लिए प्रतीक्षा ना करें बल्कि उसे उसी समय पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करें । समय का सदुपयोग हमें तरक्की की ओर ले जाता है। आपने यह दोहा भी सुना होगा -

काल करे सो आज कर आज करे सो अब ।

पल में प्रलय होएगी बहुरि करोगे कब कभी भी।।

जीवन में यह मत सोचो कि जो हमने हासिल किया है वह सदैव हमारे पास ही रहेगा । जो आज हमारा है शायद वह कल हमारा न रहे , इसलिए समय का आदर करें , उसका सही इस्तेमाल करें क्योंकि समय सबसे अधिक बलवान और मूल्यवान होता है ।


2.संदेह को मन से निकाल करें बाहर

हमारा जीवन एक गाड़ी की तरह है और संदेह उस गाड़ी में लगे ब्रेक की तरह होता है । अक्सर हम ब्रेक के इस्तेमाल से गलत दिशा में जाने से तो बच जाते हैं मगर यदि हम अपना पैर हर समय ब्रेक पर ही रखेंगे तो गाड़ी आगे नहीं बढ़ पाएगी । ठीक इसी तरह जिंदगी में हर चीज पर हर वक्त संदेह करने से हम सही निर्णय नहीं ले पाते और जिंदगी में पीछे रह जाते हैं । संदेह हमारी सोच को धुँधला कर देता है और हमें हर चीज की जाँच करने पर मजबूर कर देता है जिससे हम हर चीज और व्यक्ति में खामियाँ ढूँढने लग जाते हैं और कभी भी उन्हें मन से स्वीकार नहीं कर पाते । यदि हमें जिंदगी में आगे बढ़ना है और कुछ हासिल करना है तो निसंदेह चीजों को स्वीकार करना चाहिए ।

जहां सही मात्रा में संदेह बुद्धिमान व्यक्ति का एक चिह्न माना जाता है - एक पहचान माना जाता है,  परंतु वहीं दूसरी ओर अत्यधिक संदेह एक विशाल रुकावट है जो आपको आगे बढ़ने से रोकता है इसलिए चीज और व्यक्तियों में कमियाँ और कमजोरियाँ ढूँढने की बजाय उनकी अच्छाइयों और सकारात्मकता को न केवल स्वीकार करें बल्कि अपनाना भी आना चाहिए । हर चीज में संदेह करने वाले व्यक्ति को सुख की असल प्राप्ति नहीं होती । अपने स्ंदेहों पर संदेह करें और अपने विश्वासों पर विश्वास करें क्योंकि असली सुख की प्राप्ति विश्वास करके ही होगी , संदेह करके नहीं।


3.अहंकार है विनाश की जड़

क्या कभी आपने सोचा है कि हमें इस दुनिया में लाने वाले हम नहीं बल्कि कोई और है और दुनिया में नाम देने वाला भी कोई और ही है और जो हमने कमाया वह भी कल किसी और का होगा इसलिए देखिए दुनिया में आने से पहले दुनिया में जाने तक कुछ भी हमारा नहीं है तो चीजों पर हम घमंड क्यों करते हैं क्यों अपनी कामयाबी पर, क्यों अपने पैसे पर अहंकार करते हैं ।

जो कुछ भी आज हमने हासिल किया है वह शायद कल हमारा ना रहे । हमारे जाने के बाद तो किसी और का होगा ही , तो जिस पर हमारा पूरा अधिकार नहीं , उस पर घमंड कर के क्या फायदा । 

अपनी कामयाबी को और अपनी दौलत को अपना अभिमान मानकर दूसरों को नीचा दिखाने वाले लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि जिस दौलत को वे घमंड से अपना बता रहे हैं असल में वह तो उनकी है ही नहीं । खुद के पास मौजूद कामयाबी से यदि किसी और को छोटा दिखाया जाए तो वह कामयाबी नहीं बल्कि विनाश की सीढ़ी है, जड़ है । 

अहंकार और घमंड हमारी सोच को दिशाहीन बनाकर हमें बर्बादी की ओर ले जाता है जिस सोच के जरिए हमने लाखों बुलंदियाँ हासिल की होती है वही सोच दूसरों की निंदा और आलोचना में लग जाती है , यही नहीं कामयाबी के नशे में चूर व्यक्ति सही गलत की पहचान नहीं कर पाता और दुनिया में स्वयं को सबसे श्रेष्ठ समझने लगता है और ऐसा करने पर उसका गिरना निश्चित है ।

इसलिए  जीवन में सदैव विनम्रता और आदर पूर्वक रहना चाहिए। दूसरों के सुख में खुश होना चाहिए क्योंकि अहंकार या घमंड विनाश की जड़ है।

धन्यवाद

Madhu DhimanPink Columnist- Haryana

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