दलदल

देख पूनम ,अब बचपना छोड़ ,बच्ची नहीं है तू। ससुराल की बातें इधर उधर करने में कोई फायदा नहीं , घर की बात घर में ही रहनी चाहिए। अब फ़ोन रख गुड़िया ,१२ बज गए हैं , सोजा , गुड्डो को स्कूल नहीं भेजेगी कल ? पूनम की माँ उसेसमझा रही थीं , अपनी सिसकियाँ गले में फसाये , आज भी पूनम ने फ़ोन रख दिया। पास में सोई हुई अपनी ४ साल की बेटी (गुड्डो ) को देखकर आंसुओ की झड़ी फिर बरस पड़ी।

दलदल

देख पूनम ,अब बचपना छोड़ ,बच्ची नहीं है तू। ससुराल की बातें इधर उधर करने में कोई फायदा नहीं , घर की बात घर में ही रहनी चाहिए। अब फ़ोन रख गुड़िया ,१२ बज गए हैं , सोजा , गुड्डो को स्कूल नहीं भेजेगी कल ? पूनम की माँ उसेसमझा रही थीं , अपनी सिसकियाँ गले में फसाये , आज भी पूनम ने फ़ोन रख दिया। पास में सोई हुई अपनी ४ साल की बेटी (गुड्डो ) को देखकर आंसुओ की झड़ी फिर बरस पड़ी।

आज से 5 साल पहले पूनम की शादी एक बहुत ही अच्छे परिवार में ” अमर के साथ हुई। अपने पिता के ही मित्र का परिवार , सकुशल और सपन्न परिवार है ,मन में विश्वास रखते हुए अपनी बेटी पूनम का हाथ अमर के हाथ में थमा दिया।पूनम भी इंग्लिश से ऍम ए थी। सब अच्छा है , पूनम खुश है और क्या चाहिए हमें ? यही सोच के पूनम के बूढ़े माता पिता , उसकी शादी के बाद सुकून के लम्हे बिता रहे थे। शादी के १० दिन बाद, पूनम ने सुबह ४ बजे अपनी माँ को फ़ोन किया , सुपकने की आवाज़ साफ़ साफ़ सुनाई पड़ रही थी ! पूनम गुड़िया क्या हुआ ? गुड़िया कुछ तो बोल , पूनम रात के ३ बजे है , अमर कहाँ हैं ? माँ मुझे घर आना है ! पूनम की धीमी आवाज़ में घर लौटने की सुपक ने , माँ के दिल के जैसे १०० टुकड़े कर दिए थे। क्या हुआ बच्चा , गुड़िया घर की याद आ रही है क्या बेटा ? माँ मैं अमर के साथ नहीं रह पाउंगी , वो मेरा सम्मान नहीं करता , वो मेरी भावनाओं को , मेरे मन को , मेरे शरीर को एक मांस का टुकड़ा समझता है।

क्या बोले जा रही है , दाम्पत्य जीवन में शारीरिक संबंध का होना अभिन्न है। तुम्हारे लिए शायद सब कुछ नया है , इसलिए ज़्यादा दिमाग पर ज़ोर मत डालो। पर माँ , तुम मेरी पूरी बात भी नहीं सुन रहीं। बहुत रात हो गयी है , सुबह फ़ोन करती हूँ गुड़िया , सो जाओ तुम अभी , अमर ने सुन लिया तो क्या सोचेगा , आपस में पति पत्नी बैठ कर बात करो।मैं सुबह फ़ोन करुँगी , रखती हूँ, सो जाओ तुम अभी ।

कहकर फ़ोन काटने की बीप ने पूनम के दिल को और आहात कर दिया , माँ तुमसे नहीं कहूं , तो किससे कहूं , काश भाई की जगह ,एक बहन दी होती ईश्वर ने मुझे। रोते रोते आँखे भारी हो चलीं थी , और कब आँख लग गयी पता नहीं चला। सुबह आँख खुली तो अमर ऑफिस के लिए निकल चुका था , उसने बिस्तर से उठने की कोशिश की मगर पैर का कांपना बंद नहीं था।

थोड़ी देर बाद सासू माँ ने कमरे का दरवाजा खटकाया , बहु उठ गयी ? कमरे में अंदर आयी तो देखा पूनम बिस्तर पर इधर उधर बैचैन से करवट बदल रही थी , माथा छूकर देखा तो देह बहुत गरम लगी , अपने पति को आवाज़ लगायी और डॉक्टर के पास चलने को कहा।

सास ससुर दोनों पूनम को स्त्री विशषज्ञ डॉक्टर के पास लेकर गए , डॉक्टर ने पूनम को चेक किया और बाहर आकर बोलीं ” आपकी बहु के साथ रेप हुआ है ! उनकी बात सुनकर जैसे अमर के माता पिता के पैरों तले की ज़मीन खिसक गयी हो। कैसी बात करतीं है , क्या मतलब है रेप हुआ है ! अमर के पिता गुस्साई आँखों से बोले और उठकर बाहर चले गए ! चेक अप रूम से पूनम की सिसकियाँबात साफ़ सुनाई दे रहीं थीं। अमर की माँ ने डॉक्टर से कहाँ ” मैडम देखिये , अभी १० दिन हुए हैं मेरे बेटे अमर और पूनम की शादी को , ख़ुशी का माहौल है घर में , ऐसे शब्दों का इस्तमाल ना करें आप , विनती करती हूँ। डॉक्टर ने साफ़ शब्दों में दोहराते हुए कहा ” आप मेरी बात ध्यान से सुनिए , पूनम के ऊपरी शरीर के साथ साथ , आंतरिक अंगों पर गहरी चोंटें साफ़ साफ़ दिखाई पड़ती हैं ,ये आम शारीरिक सम्बन्ध की निशानी नहीं , इसलिए पूनम के शरीर में ना जाने कितने इन्फेक्शन हुए हैं , आप मेरी बात ध्यान से सुनें ” पूनम को उसके घर वापस भेजिए , पूनम ने मना किया है , नहीं तो मैं क़ानूनी कार्यवाही कर सकतीं हूँ इसकी।

दवाइयां दे रही हूँ , ध्यान रखिये उसका और घर भिजवा दीजिये उसे अपने। कहकर दवाई का परचा हाथ में थमा दिया। पूनम चेकअप रूम से उठकर धीरे धीरे कदम बढाती बाहर आ गयी। घर वापस पहुंचकर , भांप चुकी थी की राह आसान नहीं है , माँ भी कुछ सुनने को तैयार नहीं। अमर के पिता ने अमर को फ़ोन लगाया और तुरंत घर वापस लौटने को कहा। अमर को घर आते ही सारी बात का पता चला ! माँ पापा , डॉक्टर के पास जाने की क्या ज़रूरत थी , जानते हो न शहर में हमारे परिवार का कितना नाम है , और क्या नाटक है पूनम ? मुझसे बात नहीं कर सकती थीं , अमर की ये बात सुनकर पूनम एक टुक बस अमर का चेहरा देखती रह गयी और बोली ” तुम सुनते भी हो , मुझे लगा बहरे हो ! थप्पड़ मारने के लिए उठे हाथ को रोक कर ,पूनम अपने कमरे में चली गयी।

बात पूनम के घर तक भी पहुंची ,मगर शादी के बाद रेप जैसे शब्द हर किसी के लिए बेमानी हो जाते हैं , वापस अपने घर लौटी तो कुछ महीने बाद अच्छाई और इज्जत का ढोंग रचकर , अमर के परिवार वाले पूनम को वापस ले गए। कहीं न कही पूनम मान बैठी थी बस अब कोई राह नहीं , मगर जब जब आहत होती तो माँ को फ़ोन लगाती ! फिर वही समझने बुझाने के बाद सब शांत हो जाता। बीते 5 सालों से पूनम यही सब झेल रही थी , मगर सुनने वाला कोई नहीं था। कहने को अपने माता पिता की एक ही लड़की थी पूनम , बड़ा भाई है , जो विदेश में नौकरी करता है।

इसी बीच पूनम ने एक बेटी को भी जन्म दिया , उसकी सूरत देख वो अब जीने लगी थी , मगर बेटी के जन्म पर खुश होने की जगह, वह भयभीत थी। ईश्वर लड़की क्यों दी तूने मुझे , इसका जीवन मेरे जैसे नर्क मत बनाना। अमर और उसका रिश्ता बस नाम का रिश्ता था , दिन पे दिन पूनम का स्वास्थ्य भी गिर रहा था , अब वो थक चुकी थी , इसलिए कोई शिकायत नहीं करती।

5 साल बाद पूनम के भाई भाभी विदेश से लौटे , तो सीधा पहले पूनम की ससुराल जा पहुचें। पूनम और उसके भाई राकेश का रिश्ता बचपन से ऐसा था , जैसे दीपक से ज्योति का रिश्ता। घर की चौखट पर खड़े अपने भाई भाभी को देख जैसे पूनम ख़ुशी से पागल हुई जा रही थी। दौड़कर दोनों के गले लगी ,तो फूट फूट कर रोने लगी , भैया बहुत देर कर दी आने में , बहुत देर हो गयी , बार बार बस यही दोहरा रही थी। पूनम के रोने की आवाज़ सुनकर अमर और उसकी माँ बाहर आ गये और मुस्करा कर बोले , अरे राकेश तुम , आओ आओ अंदर आओ , पूनम … भाई भाभी पांच साल बाद तुम्हारे घर आये हैं , दरवाज़े पर ही खड़ा रखोगी। पर पूनम को जैसे आज कुछ सुनाई न पड़ता हो , दुबारा आवाज़ ने ध्यान तोडा तो भाभी का हाथ पकड़कर बोली ” भाभी मुझे घर ले चलो , मेरा दम घुटता है यहाँ , यहाँ रही तो ज़्यादा जी नहीं पाउंगी , भैया तू तो हमेशा मेरी सुरक्षा का वादा करता था न , मुझे इन राक्षसों से बचा ले।

सुनकर राकेश की आँखें झरझर बरस रहीं थी , क्या हालत हो गयी है गुड़िया तेरी ,तूने फ़ोन पर भी कभी कुछ नहीं कहा। पूनम को हाथ पकड़कर भाभी(रश्मि ) ने कहा ” पूनम साफ़ साफ़ बताओ बात क्या है , और अपना सामान बांधो चलो मेरे साथ अंदर। पूनम ने अपने कमरे में जाकर रश्मि को अपनी मेडिकल फाइल्स दिखाई , रश्मि भी पेशेवर डॉक्टर थी , रिपोर्ट देखते ही , गुस्से से लाल चेहरा लिए बाहर गयी , और राकेश को पुलिस को फ़ोन करने के लिए कहा। पुलिस , पुलिस क्यों ?राकेश ने रुंधी आवाज़ में पूछा ,पूनम के साथ पिछले पांच साल से मैरिटल रेप हो रहा है ” its a heinous Crime ,call the police right now !

चिल्लाते हुए रश्मि बोली और पूनम को कसकर गले लगा लिया। गुड्डो का और अपना सामान पैक करो , हम इसी वक़्त पूनम को लेकर जाएंगे और तुम लोग जाओगे , जेल !अमर और उसके माता पिता की तरफ इशारा करते हुए कहा, राकेश ने कहा ।

जैसे ही राकेश और रश्मि , पूनम और गुड्डो को साथ लेकर बाहर निकले वैसे ही पुलिस भी आ गयी , आस पास के सारे लोग ,बाहर आकर देखने लगे। घर से कदम निकालते हुए आज पूनम का मन जैसे दुनिया भर की खुशियाँ पा गया। कुछ समय बीतने के बाद पूनम ने एक छोटे स्कूल में नौकरी शुरू की और नए सिरे से जीवन की शुरुआत की।

ये महज़ कहानी नहीं है , भारतीय समाज में मैरिटल रेप को समझना, आज भी लोगों की समझ से परे है, जैसे पूनम के माता पिता नहीं समझ पाए। अगर आपके आस पास कोई इस तरह के बर्ताव को झेल रहा हो , तो उसकी मदद ज़रूर करें। कहते हैं , जान है तो जहान है ! शादीशुदा जीवन में शारीरिक सम्बन्ध का बनना आम बात है , मगर ज़बरदस्ती इस सम्बन्ध को बनाना एक अपराध है !

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