सुंदरता सोचने का अंदाज़

सुंदरता सोचने का अंदाज़

सुन्दर वो नहीं जो बाहरी सुंदरता या केवल मन की सुंदरता को देख के प्रभावित हो बल्कि सुन्दर वो है जो हर बुराई में से भी सुंदरता परख ले और ऐसी ही एक लड़की जिसका नाम 'रूपल' था जो हर चीज़, हर इंसान में कितनी भी बुराई क्यों न हो,  रूपल को अच्छे से पता था कि बुराई में से सुंदरता बाहर कैसे निकाली जाती है। 

वो हर इंसान , और चीज़ों के अच्छे पहलु को देखती थी और हमेशा सुन्दर और अच्छा परख लेती थी अगर कभी गलत चुन भी लेती तो उसका अच्छा पहलु देख के खुद से ही कह देती थी "रूपल तुम इतनी सुन्दर कैसे हो, कितना सुन्दर सोच लिया तुमने" और फिर अपनी पीठ थपथपाती थी। उसकी सकारात्मक शक्ति के आगे सब लोग उससे बहस में हार जाते थे क्यूंकि वो हर इंसान को गलत चीज़ का सुन्दर पहलु दिखाती थी जिससे लोग खुश हो जाते थे। 
 
एक बार उसकी इस शक्ति ने एक उसके पड़ोस में रहने वाले बुजुर्ग आदमी को ठीक कर दिया था। हुआ यह कि वो अपने पड़ोस में रहने वाली आंटी के पास कुछ लेने के लिए गई , वहां खाट पर अंकल लेटे हुए थे। बिलकुल गुमसुम से, परेशान से , उदास से। उनसे बातें करने वाला कोई नहीं था। अचानक रूपल की नज़र उनके कमरे में रखी तस्वीरों पर गई जिसमें अंकल काफी ज़िंदादिल और बिंदास खुश नज़र आ रहे थे।

रूपल के मुँह से निकला "ओह अंकल ये आप हो , मैं मान ही नहीं सकती , आप तो पहचान में ही नहीं आ रहे , इतने ज़िंदादिल, इतने खुश , इतने स्वस्थ नज़र आ रहे हैं आप , अब क्या हो गया आपको , आप देखिये कितने हैंडसम लग रहे हो इन तस्वीरों में, आज भी आप ज़िंदादिल हैं, उठिये सुबह की सैर करिये आप कर सकते हैं मैंने इतने ज़िंदादिल अंकल कोई नहीं देखे।" अंकल को इतना सारा अपने बारे में सुनके उनको अच्छा लगा और उनके जीने का नज़रिया बदल गया। 

आंटी ने रूपल को फ़ोन करके बताया "बेटी ऐसा क्या दवा पिलाई अंकल को तूने , जो अंकल खाट पर बीमार पड़े रहते थे आज वही अंकल खुद खाट पर से उठे और खुद पानी का गिलास लेके आये अब छत पर टहल रहे हैं, जुग जुग जियो बेटी , बस मुझे बताओ तुम इतनी सुन्दर सोच कैसे रखती हो, इतना सुन्दर बोलना कहाँ से सीखा।" आंटी ने रूपल को ढेर सारी दुआएं दी। 

रूपल को एक सुंदरता की कांटेस्ट में हिस्सा लेना था तो वह फॉर्म लेके आ गई और जैसे ही भर के भेजने लगी तो रूपल की माँ ने कहा "रूपल वहां बहुत सुन्दर लड़कियां आती हैं , यह प्रतियोगिता तेरे मतलब की नहीं है।"

"क्यों इसमें यह लिखा है की उस लड़की का सुन्दर होना ज़रूरी है" रूपल ने तपाक से कहा।  रूपल हज़्ज़िरजवाब तो थी उसके नैन नक्श भी सुन्दर थे, स्मार्ट थी पर सावंला रंग की वजह से थोड़ा मात खा जाती थी पर रूपल ऐसा कुछ भी नहीं सोचती थी लोग कुछ भी ऐसा कहते थे तो वह उसका अच्छा पहलु बता कर चुप कर देती थी। 

वो कहती थी "तुम को तो नहीं दिया न ये रंग, ये सावंला रंग मुझे भगवान् ने दिया है इसका मतलब तेरे से ज़्यादा मुझे प्यार करता है भगवान् और वैसे भी अंदर से तो हम सब काले ही हैं। भगवन भी तो ऊपर जहाँ कुछ नहीं दिखता काला होता है वहीँ पर से तो आते हैं हम सब।"  

सुंदरता की प्रतियोगिता में रूपल ने तीन पड़ाव पार कर लिए और आखिरी पड़ाव आया तब वहां प्रश्नकर्ता ने एक सवाल किया कि "अगर आप किसी ऐसे लड़के के चक्कर में फस जाएँ जो आपसे कम पढ़ा लिखा हो और कम पैसों की नौकरी करे तो आप क्या करेंगी"

"तो सुनिए मैं सबसे पहले तो अगर मेरे साथ ऐसा हो भी जाए तो मैं भगवान् का शुक्रिया अदा करुँगी की मेरी शादी जिससे मैं प्यार करती हूँ हुई है , अब मेरे माँ बाप तो मेरे लिए मेरे साथ का जोड़ा ही ढूंढेंगे न। दूसरी बात अगर ऐसा हो भी जाए तो मैं उसे आगे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करुँगी और उसके साथ मिल के घर के खर्चों में अपना हाथ भी बंटाऊंगी पर हमारा जीवन खुशियों से भरा होगा।

अगर परेशानी आएगी भी तो कुछ नहीं कर पायेगी क्यूंकि मैं उस परेशानी का भी हल ढूंढ लूंगी। इतना अपने ऊपर भरोसा है। भगवान् सदा मेरे साथ अच्छा करता है, अच्छा करता आया है और अच्छा करता रहेगा। " रूपल ने पुरे आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया 

प्रशनकर्ता रूपल की बातों से बहुत प्रभावित हुए और रूपल ने यह सुंदरता की प्रतियोगिता अपने सुन्दर सोच और आत्मविश्वास के बल पर जीत ली थी।  ये मंजर रूपल के साथ आए दोस्त भी देख रहे थे और फक्र कर रहे थे कि हमारे पास ऐसी दोस्त है। जो दोस्त उसके साँवले पन का मज़ाक उड़ाते थे आज वही उसे कह रहे थे "रूपल! तुम इतनी सुन्दर कैसे हो , हर चीज़ की सुन्दरता कैसे देख लेती हो"

और रूपल बस सिर्फ हँस के इतना कहती "सोच के देखो तब पता चलेगा की ये दुनिया कितनी सुन्दर है" 

दोस्तों अपनी प्रतिक्रिया ज़रूर दें, हौसला मिलता है और अपने विचार अच्छे से व्यक्त कर सकूँ। ...  
 
स्वरचित 
हैप्पी {वाणी} राजपूत  -

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