सुनीता आँटी !

सुनीता आँटी !

अक्सर जिन्दगी मे हमे कुछ ऐसे लोग मिल जाते हैं जो बात बेबात बस यूँ ही रोक टोक करते रहते हैं और हम सब  इन लोगों से दूरी बना लेते हैं!  आइये मिलते हैं ऐसी ही हमारी सुनीता आँटी से!

सुनीता आँटी, बहुत सुन्दर और फॅशनबल ! दो बेटे थे उनके और अंकल की ट्रांसफर के कारण वो इस छोटे से शहर में रहने आये थे ! जल्दी ही आँटी  आस पास के सब लोगों की चहेती बन गई ! थोड़ा बहुत पढ़ी लिखी थी वो और म्यूजिक का भी शौंक रखती थी, घर बहुत सुन्दर सलीके से सजा कर रखती और अपने दोनों बेटों की तो शायद बहुत अच्छी दोस्त थी वो ! इन सभी कारण से बड़े लोगों को आँटी  बहुत पसंद थी !

लेकिन बच्चों के मन में वो ज्यादा जगह बना नहीं पाई और उसका कारण था उनका बच्चों को रोक टोक करते रहना ! सुहानी के घर से थोड़ा सा ही दूर था उनका घर, सुहानी को आँटी  एक आँख भी नहीं सुहाती थी ! दोपहर को साइकिलिंग करो तो वो अपनी खिड़की से आवाज लगा देती; इतनी दोपहर को घर में बैठो, ये क्या टाइम है साइकिलिंग का ! उनके घर के पास से निकलते जोर से बोलो तो बाहर आकर बोलती; आराम से बात नहीं कर सकते हो, इतना ऊंचा कौन बोलता है ! किसी दिन ज्यादा काजल लगाया तो; इतना क्यूँ लगाया ! मार्क्स कितने आये ? पेपर कैसे हो रहे हैं ? उनका क्यूँ, कैसे कभी जैसे ख़तम ही नहीं होता था !

सुहानी 9th क्लास में पढ़ती थी और अपनी दोस्त अंजलि के साथ ट्यूशन पढ़ने जाती थी ! सर्दियों के दिन थे और सुबह के 6:30 बजे ट्यूशन पहुंचना होता था ! सालों पहले माहौल काफी सेफ होता था और माँ-बाप को बच्चों की ज्यादा टेंशन नहीं लेनी पड़ती थी तो सुहानी और अंजलि दोनों सुबह सुबह अकेले ही ट्यूशन के लिए चले जाते थे ! सुहानी के मन मे आँटी  के लिए नेगेटिव इमेज बन गई थी ! आँटी  के घर में आना जाना उसे बिलकुल पसंद नहीं था ! उसको इतनी सुबह आँटी  के घर की लाइट ऑन देखकर भी लगता जैसे आँटी  उन पर नज़र रख रही है और उनके घर को अवॉयड करने के लिए वो दोनों एक शॉर्ट कट से निकलते थे! वो दोनों अक्सर बोलते की आँटी  की अपने घर में तो कोई बेटी नहीं है तो हमे ही डांटती रहती हैं !

खैर अभी क्या हुआ, अंजलि जब एक दिन सुहानी को ट्यूशन के लिए बुलाने आई तो पता चला की वो अचानक बहुत बीमार हो गई और और हॉस्पिटल में एडमिट है! अंजलि को थोड़ा फर्क तो पड़ा लेकिन उन दिनों में डर वगेरा कुछ होता ही नहीं था तो अकेले ही ट्यूशन जाती रही ! उसके मम्मी पापा ने भी मना नहीं किया अकेले जाने से, न ही टीचर ने कुछ ऐसा कहा तो रूटीन चलता रहा !

पता नहीं क्यूँ पिछले दिन से ही उसे ऐसे लगता रहा जैसे कोई उसका पीछा कर रहा है , लेकिन पीछे देखती तो कोई होता ही नहीं था ! कभी कभी दूर से कुछ लोग सुबह की सैर करते हुए उन्हें मिलते थे तो सोचा की उनमे से ही होगा कोई ! और आराम से उस दिन तो वो चली गई !

आज दूसरा दिन था और उसे वैसा ही महसूस हो रहा था की पीछे कोई तो है ! सच में उस दिन वो इतना डर गई की पीछे देखने की भी हिम्मत नहीं हुई ! दिमाग ने जल्दी जल्दी इतना ही काम किया की मै रास्ता बदल लूँ और आँटी  के घर की तरफ – जंहा से ज्यादा लोग सैर  पर जा रहे हो वँहा से चला जाये ! डर के कारण उसे पसीने आ रहे थे ! हाथ में टॉर्च थी तो उसकी रौशनी लगातार आगे या दोनों तरफ मारते हुए चल रही थी ! रास्ता बदलते ही उसका डर चला गया था, अब वो थोड़ा अच्छा भी मह्सूस करने लगी!

आगे जाकर एक पॉइंट पर दोनों रास्ते एक ही धर्मशाला पर मिलते थे और वो वंहा पहुंच गई ! टॉर्च अभी भी जल रही थी और एकदम से उसे अपने दाएं तरफ दिवार के पास एक परछाई नज़र आई, उसे लगा  की वँहा कोई है! हाथ पाँव सब ठन्डे हो चुके थे , उसे पूरा दम लगाना पड़ा मुँह से इतना बोलने को “कौन है – कौन है वँहा” ! कोई सामने नहीं आया, वो फिर से बोली “ कौन है—– बताओ” !

उसके हाथ पाँव सब काँप रहे थे ! और अबकी बार वो परछाई थोड़ा चलकर सामने आ गई, बस वो कुछ सेकण्ड्स का समय और अंजलि ने उसे पहचान भी लिया, काफी बड़ी उम्र के भइया जो हर रोज़ सैर पर आते थे, ये वो ही थे, पर साथ ही उसे ये भी समझ आ गया की कुछ गलत है उनके दिमाग में ! पीछे मुड़कर जितना तेज भाग सकती थी भागी और भागते भागते सुनीता आँटी  के घर के दरवाजे पर पहुंची।

डोरबेल्स का ज़माना नहीं था वो, तो जोर जोर से आँटी  का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया ! एक एक पल बहुत भारी लग रहा था ! वो आँटी-आँटी  बोले जा रही थी ! अंकल ने दरवाजा खोला, अंजलि को देखकर अंकल हैरान थे “क्या हुआ बेटा”? वो आँटी-आँटी ही बोले जा रही थी ! जैसे ही आँटी आई अंजलि उनके गले से लग गई और बस हाथ से यही इशारा किया ” कोई है धर्मशाला के पास”, उसे कुछ होश नहीं उसके बाद !

होश आया तो आँटी  की गोद में सर था और आँटी  उसे पानी पीला रही थी, फिर उन्होंने पूछा क्या हुआ था बेटा?

अंजलि: अंकल कँहा है?

आँटी  : बेटा अंकल और दोनों भैया बाहर देखने गए हैं की कौन था ! तुम क्यों इतना डर गई थी “!

इतने में वो लोग वापिस आ गया और  दोनों भैया के हाथ में बैट था !

बड़े भैया ने बताया, “वो जो कार्नर वाला घर है उनका बड़ा बेटा था, वो अपना दरवाजा खोल ही रहा था तो पापा ने उसे पकड़ लिया ! उसने कहा की मै तो हर रोज़ सैर पर जाता हूँ, और मुझे पता है ये दोनों लड़किया उस समय पढ़ने जाती है ! वो लड़की ऐसे ही डर गई मै तो यंहा अपने घर जाने के लिए ही खड़ा था! लेकिन पापा नहीं माने और बोलते की तुम्हारा घर तो यँहा गली के लास्ट में है तो तुम वँहा क्यों खड़े थे ! अब तो मै यंहा से तुम्हारे माँ बाप और पत्नी से मिलकर ही जाऊँगा और नहीं तो पुलिस को कंप्लेंट करूंगा, तुम बताओ अब कैसे करना है?

उसने कहा की मै चलकर उस लड़की से माफ़ी मांग लेता हूँ तो पापा ने कहा, सवाल ही पैदा नहीं होता, कंही हमारी बेटी दिख भी जाये तो दूर से ही रास्ता बदल लेना, वो आज घबरा गई पर अगली बार तुम्हारा सर तोड़ देगी, ध्यान रखना! इतने में बाहर की हलचल सुनकर उसका दरवाजा भी खुल गया ! सारी बात पता चलने पर उसकी मम्मा  ने पापा से कहा, भाईसाहब मै इसकी गलती मानती हूँ पता नहीं ये ऐसे क्यों करता है ! हर रोज़ कोई न कोई शिकायत आती ही रहती है ! हमारी बहू भी इसकी ऐसी हरकतों के कारण अपने मायके से वापिस नहीं आ रही ! अबकी बार मै इसे अच्छी सज़ा दूंगी, ताकि ये दोबारा कभी अपनी गलतियां न दोहराये! आप चाहे तो अभी मै बच्ची से मिल लेती हूँ!लेकिन पापा ने मना कर दिया और कहा की अँधेरे अँधेरे में ये बात सुलझ जाये तो अच्छा है नहीं तो कल आपका बेटा जेल में बैठा होगा ! ये जो दो बैट हाथ में हैं इसके सर पर एक भी पड गया तो हॉस्पिटल में ही होश आएगा ! आईंदा ध्यान रहे मेरी बेटी इसी रास्ते से हर रोज़ जाएगी हो सके तो अपने बेटे की सैर का टाइम बदलवा लेना ! और हमारी बेटी क्या कोई भी बच्चा इधर से गुजरे तो उसकी तरफ देखना भी नहीं!”

भैया फिर बोला “मम्मा उनका मुँह देखने लायक था, बहुत डर गए थे वो भैया पापा की बातों से और हमारे बैट को देखकर तो और भी ज्यादा!”

अंकल ने कहा, अंजलि बेटा बिलकुल डरना नहीं, अभी वो गलती से भी कभी सामने नहीं आएगा !

अंजलि को शब्द भी नहीं मिल रहे थे बोलने को, बस उसने सबको धन्यवाद किया “थैंक यू आँटी , थैंक यू अंकल एंड थैंक यू बोथ- भैया” !

लेकिन आँटी  ने अंजलि की तारीफ करते हुए कहा “बेटा आज तुमने समझदारी और हिम्मत से काम लिया नहीं तो कोई भी मुसीबत आ सकती थी !”

फिर आँटी  ने अंजलि से उसकी टीचर को फ़ोन करवाया की वो आज नहीं आ पायेगी और 8 बजे तक अंजलि को वंही अपने पास रखा और फिर घर तक उसे छोड़ने चली गई, रास्ते में आँटी  ने अंजलि से वादा लिया की कभी दोबारा किसी भी हालात में डरोगी नही और ऐसे ही हिम्मत से काम लेगी! साथ में उन्होने अंजलि को ट्यूशन टाइम बदलवाने को भी कहा और घर में ये बात न बताने की हिदायत भी दी की नहीं तो मम्मी पापा अकेले बाहर जाना बंद करवा देंगे !

उस दिन अंजलि को समझ में आ गया की वो माँ की तरह आँटी  का डाँटना यूँ ही नहीं था, जब मुश्किल आई तो उन्होंने और उनके परिवार ने कारण भी नहीं पूछा और जाकर सब खुद ही सुलझा भी लिया !

सुहानी जब ठीक होकर घर आई तो अंजलि ने ये सब बातें उसे बताई और उस दिन से सुनीता ऑन्टी उनकी बेस्ट आँटी  बन गई !

दोस्तों अक्सर हम रोक टोक करने वाले लोगो को बुरा ही मान लेते हैं लेकिन दिल बात की साफ़-साफ़ कहने वाले ये लोग समय आने पर अक्सर बहुत अच्छे साबित हो जाते हैं ! उम्मीद हैं आपको ये छोटा सा प्रयास पसंद आया होगा, आपके कमैंट्स का इंतज़ार रहेगा!

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