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सुन सखी अपने दिल की

सुन सखी सुन, मेरी नहीं, अपने मन की सुन,  अपने आत्मसम्मान की रक्षा तू स्वयं कर,  न रह तु सकुचाई सी,  हर पल मुरझाई सी । अधिकारी है तू भी सभी खुशियों की  तू भी स्वाभिमान से जी,...

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