टैग : #अनकहेभाव #अनछुएअहसास

वक्त और बदलाव की जरूरत है

वर्तमान में कोरोना संक्रमण के चलते देश में फैली महामारी चिंता का विषय है ।कोशिश बस इतनी ही हो कि जो विनाश हो चुका उसे स्वीकार कर लें पर भविष्य में और विनाश ना होने दें। जीवन की शुरुआत के लिए अभी और... वक्त और बदलाव की जरूरत है...

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माँ काश तू होती साथ मेरे

"माँ! एक ममता की मूरत, प्यार का सागर हर मुश्किल का हल लेकर साथ रहती है माँ. मेरे दिल से मेरी माँ के लिए कुछ शब्द निकले है उन शब्दों को पिरो कर मैंने ये कविता लिखी है"...    "माँ काश तू...

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राही किस ओर चला....

कई बार हम संघर्षों से घबराकर हार मान लेते हैं और आत्महत्या जैसा घातक कदम उठा लेते हैं, जो अनुचित है।जीने की प्रेरणा देती मेरी यह रचना..... राही किस ओर चला क्षितिज एक छलावा है....क्षितिज के उस पार क्या है किसी ने न...

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बेटियाँ

दुनियाभर में लड़का और लड़की में भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं। बालिकाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता है। बहुत सारे ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें बालिकाओं को उनके जन्म से लेकर उनके पालन-पोषण के दौरान उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य...

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अंतर्मन से मुलाक़ात

सब का पूछते पूछते हुए हाल गुजर गए कितने साल तो सोचा कि चलो जाने आज खुद का भी थोड़ा हाल  थोड़ी अचकचाई थोड़ी शरमाईकि आज मुझे खुद की सुध कैसे आयीफिर जब झाँका अपने दिल में 

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मन की खिड़की खोल दे...

अकेले दौड़ने वाले जीतेगा किससे ?जब कोई और दौड़ने वाला ही न होगा,जीत की खुशी आयेगी कैसे तेरे हिस्से,आगे बढ़ने वाले को गिराने का हुनर आता है तुम्हें,यह क्यों नहीं कहते कि बियांबा ही भाता है तुम्हें,अहम...

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माना विवाह एक संस्कार... लेकिन क्यूँ जरूरी कन्यादान ?

एक प्रश्न बेटी का अपने बाबुल से..माना विवाह एक संस्कार है..लेकिन क्यूँ जरूरी कन्यादान है? पैदा होते ही दाई की आवाज़ आई, लड़की आई है,नेग नहीं,बस ले आओ मिठाई।...

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फ़ेमिनिज़म के फ़तवे को फगाकर आई हूँ

फ़ेमिनिज़म के फ़तवे को फगाकर आई हूँ, अपने वजूद को अहं से तलाश कर खुद को पाया है।मेरे जीने का अंदाज़ जुदा है सबसे मेरे न्यायाधीश ना बनों, मेरी किस्मत का फैसला करने का हक मैंने किसी को नहीं दिया। मैं अपने नियम खुद बनाती...

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कन्या जन्मोत्सव बधाई गीत

सखियों बेटे के जन्म पर बधाई गीत तो अक्सर आपने बहुत सुने होंगे । इसके विपरीत शायद ही या बहुत कम हमारे समाज में बेटी के जन्म पर बधाई गीत, जच्चा गीत या सोहर गीत गाए जाते हो। आज मैंने बिटिया जन्म पर बधाई...

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मैं तेरी उम्र हूँँ

द्वार पर दस्तक हुई धीरे हौले हौले देखा मैंने इधर उधर कोई द्वारा खोले सब अपने में मगन थे कुछ सुना ही नहीं हार कर खुद उठी किसीसे कहा भी नहीं झाँका जो झरोखे से, कोई थी बाहर खड़ी वह...

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