टैग : #अनकहा भाव

नारी

नारी से सृजित है ये संसार सारा प्रकृति के कण कण में शक्ति बनकर समाई है कभी शीतल कभी निर्मल तो कभी पावन है वो और कभी तेज लौ सी जगमगाई है है तितली जैसी चंचल वो, लहरों जैसी बलखाती है तो कभी...

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हे पुरुष! स्त्री भी जीने की हकदार है!

घर से निकलते ही खुद को समेटतीकभी दुपट्टा तो कभी कुर्ते को जाँचतीअनजाने स्पर्श से डरती हुई तो कभी घूरती निगाहों से भागतीथोड़ा अधिक सौष्ठव शरीर तुम्हें मिलाउस भय से यदि स्त्री को बंदिशों में रहना...

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संघर्ष की मूरत

पैदा होते ही लाद दिया मुझ पर अपेक्षाओ का बोझ, मेरे कर्तव्यो का मुझे भान कराया जाता रोज़। नारियां तो बार-बार जता सकती है कि छोडा़ है उन्होने अपना आंगन अपना द्वार, लेकिन मैं कैसे बयां करूं कि करने को सबका पोषण,...

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हमसफ़र

जब जब रूठी प्यार से मनाया तूने, मेरे ख़ामोशियों को सहलाया तूने। तुम बिन मै तो अधूरी थी मै प्रिये, मेरी जिंदगी को प्यार से सींचा तूने।  जब भी कहा सुनो तो पास आ गये, आदर सम्मान...

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मन की न कहपातीं स्त्रियाँ

अधिकांशतः आज भी मन की न कह पाती स्त्रियाँ जो कह दें बेधड़क जो छिपा सीने में उनके तो बद्तमीज संस्कारहीन कुसंस्कारी कहलाती स्त्रियाँ।। बाबुल के...

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अनकहे एहसासों को उकेर रही हूँ

अनकहे एहसासों को उकेर रही हूँ मन की उलझन और दिल में विचारों का बवंडर तबियत के लिए ठीक नहीं। दुन्यवी गतिविधियों में कुछ अनमनी सी विपदाओं का कहर ठीक नहीं।अचानक किसी मौसम का बदलना ठीक नहीं.. अबला के मौन में छिपी...

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तुम ही समझ लो ना

तुम्हारी पनाहों में ढूंढ लेती हूं अपने दिल का सुकुन नाचता है मन का मोर सुन तुम्हारी धड़कनों की धुन हर लम्हा बडा़ खूबसूरत गुजरता है तुम्हारी पनाहों में जी भर संवरता है 

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