टैग : मन की पीर

गीत मल्हार

कैसे गाएँ गीत मल्हारजब टूटें हों हृदय के तार,अबके सावन मन न भाए, हरियाली न उर-हर्षाए,रह-रह जियरा डराए, कुछ अनहोनी न हो जाए,रे बदरा तू बरस-बरस चाहे जितना रिझाए, तन-मन मेरा न भरमा पाए,विपदा की बदली ऐसी...

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