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दादी नानी की यादों संग बीता बचपन

   "दादी नानी कि यादों संग बीता बचपन " "वो बचपन भी कितना प्यारा था, जहाँ बारिश की पड़ती बूँदे दिल को लुभाती थीं, वो कागज की कश्तियाँ पानी में चला करती थीं. होड़ लगा करती थीं कि किसकी कश्ती...

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चिट्ठी आई है

 "माँ मेरा काला वाला टॉप कहाँ है"? कहती हुई पीहू ने अलमारी के सारे कपड़े निकालकर पलंग पर बिखेर दिये और पीछे की तरफ रखे अपने काले रंग के टाॅप को पहनकर शीशे के सामने खड़ी हो गई। बिस्तर पर लगे कपड़ों के ढेर को देखकर सलोनी...

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मायके की खट्टी-मीठी यादें

हाथों में मेहंदी रचा, पैरों में पायल पहने और दुल्हन के जोड़े में जब लड़की विदा होने लगती है, तो सारे सगे संबंधी यह हिदायत देते हैं कि पति का घर ही अब तुम्हारा है .पति को खुश रखना और सास ससुर की सेवा करना यही तुम्हारा धर्म...

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गोलगप्पे सा मुँह

गोलगप्पे सा मुँह बचपन की

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राज़ वो मीठा सा

बात जब बचपन की मीठी यादों की छिड़ी है तो दिमाग के अंदर विचारों का ज्वारभाटा उछालें मारने लगा है....क्या क्या लिखूँ, ये लिखूँ ,वो भी लिख दूँ। चलिए जी, एक रोचक किस्सा याद आया ,आज वहीं साझा करती हूँ।    ...

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सुनहरे दिन दूरदर्शन के संग

जी हां दूरदर्शन का नाम सुनते ही अनेक तरह के दृश्य आंखों के सामने तैर जाते हैं जिनमें कुछ तो बहुत ही हतोत्साहित करते थे जैसे सुबह नहा धो के नाश्ता करना और रामायण, महाभारत हर रविवार के दिन देखना और बाहर सड़कों...

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