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बिटिया के लिए बाबुल का आँगन है सावन

यूँ तो मायके की हर बात पर हर बेटी सावन हो जाती है। पर मायके की गली का सावन कभी भूल ही नहीं पाती। सावन के आते ही मन की रस्सियाँ पीहर के बागों में पींग डालती हैं। बाबुल के आंगन के लिये बिटिया का पीहर आगमन  है सावन

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