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मिलिए धनलक्ष्मी सुषमा तिवारी से

" वाह! घर की नेम प्लेट पर तुम्हारा नाम.. तुम तो धनलक्ष्मी हो अपने पतिदेव की.. तभी इतने प्यार से तुम्हारा नाम... और आश्चर्य!! सिर्फ तुम्हारा नाम है नेम प्लेट पर " मेरे नए घर का गृह प्रवेश था और रिश्तेदारों की ऐसी प्रतिक्रिया...

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मिलिए धनलक्ष्मी अंजलि व्यास से

"धनलक्ष्मी"तो वैसे माँ लक्ष्मी जो धन की देवी है उन्हें कहा जाता है पर हर महिला चाहें बेटी ,बहू ,पत्नी आदि हर रूप में घर की लक्ष्मी ही कही जाती है ।  मुझे याद है जब मैं छोटी थी तब हमारा कच्चा घर था ,उसमें...

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मिलिए धनलक्ष्मी डॉ मधु कश्यप से

एक एक बूँद से घड़ा भी भर जाता है "मम्मा ! बीस रूपए दो ना !गोलगप्पे खाने हैं ।"मम्मा !सौ रुपए दो ना! बुक लेनी है।" अक्सर बच्चे अपनी फरमाइश  और जरूरतों के लिस्ट के लिए मम्मी से ही पैसे माँगते हैं ,क्योंकि शायद उन्हें...

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मिलिए धनलक्ष्मी स्नेहलता त्रिपाठी बिष्ट से

बात अगर धनलक्ष्मी की चल रही है तो मेरी नज़रों में कोई महिला धन लक्ष्मी तभी मानी जायेगी जब उसके पास धन होगा और सही मायने में उसे लक्ष्मी कहलाये जाने के सभी अधिकार प्राप्त हो।ये मेरी निजी सोच है हो सकता है सभी इससे सहमत ना हो।...

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मिलिए धनलक्ष्मी प्रेम बजाज से

आज से आठ  साल पहले की बात है कि अचानक रात को मेरे ससुर जी को छाती में दर्द हुआ , डाक्टर पास जाने पर पता चला कि सिरियस हार्ट अटैक है , और सर्जरी होगी वो भी दिल्ली जाना होगा , जिस के लिए लगभग तीन लाख रूपए का खर्च होगा ।...

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मिलिए धनलक्ष्मी ममता गुप्ता से

जी हाँ !!!  हम औरतें बखूबी जानती है कि पैसो की बचत किस तरह की जाती है , फिर चाहे वो चाय पत्ती के डिब्बा हो या अलमारी में कपड़ो के बीच या और कही ।  कहा जाता है , औरतें काफी मोल भाव करती है उसका मतलब सिर्फ...

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मिलिए धनलक्ष्मी सुमेधा सुसोदिया से

धनलक्ष्मी.... प्यारा सा चेहरे पर चमक लाने वाला शब्द। मुझे तो लगता है कि एकाध को छोड़कर अधिकांश महिलाओं में यह गुण होता है। वह किसी न किसी रूप में अपने घर के लिए बचत करती ही हैं। कोई मोल-भाव करके तो कोई खरीदारी के लिए ऐसा...

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मिलिए धनलक्ष्मी संगीता त्रिपाठी

मेरी नजर  में हर औरत अपने घर की धनलक्ष्मी होती है..। क्योंकि वो घर की ही नहीं भविष्य की भी चिंता करती है..।  अपने घर की आवश्यकता को वो भली भांति जानती है..। कम है तो अपनी आवश्यकता को कम कर, अपनी गृहस्थी  सुचारु रूप...

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मिलिए धनलक्ष्मी रूचि मित्तल से

बेटा 1000 ,500,100 सबकी अलग-अलग गड्डियाँ बना देना और गिनकर पेंसिल से उस पर लिख देना।यही सब करके बड़ी हुई हूँ मैं। पापा शाम को दुकान से आते तो उनका वही चिर-परिचित थैला कंधे पर होता और उसमें बेतरतीब भरे नोट। नोट गिनने में...

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मिलिए धनलक्ष्मी रूबी जैन से

कुछ अलग ही सोच का व्यक्तित्व रहा है मेरा.. बचपन से... लड़की हो क्यों लड़कों की तरह खेलती रहती हो..?? जैसे सवालों को लेकर कई बार मुझे कटघरे में खड़ा किया जाता था..!  घर की बेटियों...

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