टैग : #my life my Choice

जिंदगी मेरी, तो पसंद मेरी क्यों नहीं?

"काश मैंने अपने मन की सुनी होती"-यह ख्याल कई बार हमारे मन में गोते खाता ही है। विशेषकर महिलाओं को एक परिधि में बांध दिया जाता है, उन्हें इसमें ही घूमना है और समाज के बनाए नियमों के अनुसार जीवन यापन करना है, उनकी जिंदगी उनकी खुद...

और पढ़ें

सलोनी ब्यूटी पार्लर

बात नब्बे के दशक के शुरुआती साल की है। तब मैं स्कूली छात्रा हुआ करती थी। नए नवेले किशोरावस्था में कदम रखा था , सजना सँवरना अब अच्छा लगने लगा था। वैसे हमारी तरफ या कहूँ उस समय के दौर में हम लड़कियाँ मेकअप शेकअप से कोसों...

और पढ़ें

गन्तव्य

शीर्षक "गतंव्य"विवाह बंधन में बंधी तान्या प्रतिकूल वातावरण से निराश तो होती। पर फिर सब कुछ अपने अनुकूल बनाने ,नित नये प्रयासो में जुट जाती,फिर भी सबको खुश नहीं रख पाती।तिस पर जतिन की अपेक्षा और उपेक्षा,उसे निराशा के उस गर्त...

और पढ़ें

जब हो परिवार का साथ

बचपन में मिस्टर शर्मा की बेटी, शादी के बाद मिस्टर गुप्ता की पत्नी इन नामों से हमेशा मुझे संज्ञा दी जाती थी। मेरे मन में एक जद्दोजहद हमेशा ही चलती रहती ,कि मेरी कोई पहचान बने, मेरा कोई नाम हो, सब मुझे मेरे नाम से जानें।काफी...

और पढ़ें

अब मैं अपने लिए जीऊँगी

जैसे ही अमन ने कहा कि क्या जरूरत है तुम्हें नौकरी करने की , तुम नौकरी नहीं करोगी । कोई क्या कहेगा कि इतने बड़े घर की बहू और यह छोटी-मोटी नौकरी कर रही है- यह सब सुनकर रूचि के पैरों तले जमीन खिसक गई।  ...

और पढ़ें

चाहत पर कोई ज़ोर नहीं

सर्कस मण्डली से थी चंपा,बचपन से माँ को सर्कस में करतब करते देखती आई है । पूरा दिन लोगों का मनोरंजन करने वाले इन लोगों को जीवन स्वयं में तंगदस्ती भरा होता है । सर्कस का मालिक कैसे इनका मानसिक, शारीरिक,आर्थिक हर तरह से उत्पीड़न करते...

और पढ़ें

जिंदगी अपनी  तो रास्ते भी अपने होगें

जिंदगी अपनी  तो रास्ते भी अपने होगें निम्मी बेटा , इस बार तुझे अगर विज्ञान में अंक अच्छे आए तो  तुझे डाॅक्टर बनने के लिए बाहर भेंजेगे। ताकि तुम आगे बढ़ सको। जम कर मेहनत करो ताकि कुछ बन सको। अपने घर में सभी डाॅक्टर...

और पढ़ें

मम्मीजी एण्ड डाटरस!!

सुनीता जी की शादी हुयी थी तब वो बी.ए . कर रही थी उनको कडाई सिलाई का बहुत शौक था उनके हाथ में जादू था एक से एक सुंदर ड्रेस  तैयार कर देती थी| पर उनके ससुराल में बहु का काम करना किसी को पंसद नहीं था ऐसा नहीं था कि उनके पति को...

और पढ़ें

दीदी, स्कूटर सिखा दूं

दूबे जी की छह बेटियां थी उनकी छोटी सी नौकरी थी सो अपनी हैसियत के अनुसार अपने बच्चों को पाल रहे थे |अपनी बेटियों को अच्छी शिक्षा दी | धीरे -धीरे करके अपनी चार बेटियों की अच्छे घर में शादी कर दी | बेटियां भी अपने घर गृहस्थी में रम...

और पढ़ें

नारी है शक्ति स्वरूपा

कहते हैं हर सफल आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है। जब औरत किसी के लिए सफलता की सीढ़ी चढ़ने में सहारा बन सकती है, तो इसका मतलब वह खुद में ही बहुत सशक्त है। क्या कभी आपने किसी कमजोर नींव पर महल बनते देखा है ?नहीं ना।ठीक...

और पढ़ें