टैग : #no more body shaming

काली ओ काली

" काली ओ काली " हाँ इसी नाम से तो बस्ती के सभी बच्चे उसे चिढ़ाते थे। और वो मासूम तब उन बच्चों को अपनी बड़ी - बड़ी आंखों से दूर तक जाते हुए देखती रहती, मुंह से...

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तुम्हारा साथ

नूपुर छोटे से कस्बे में रहने वाली साधारण मां-बाप की साधारण सी लड़की है। कद छोटा था, साधारण नेननक्स थे, तो सभी उसे नाटी कहकर चिढ़ाते। दिल तो उसका बहुत दुखता पर उसने किसी को पलट कर ऊंची आवाज में कभी कुछ नहीं कहा। बहुत सरल व्यवहार...

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हाय हाय तू कितनी दुबली है

"अरे छवि , तू तो और दुबली हो गई ! "  लल्ली बुआ ने आते के साथ छवि को टोका और अपनी बाँहों में भर लिया (मानो उसके वजन का अंदाज लगा रही हो)।लल्ली बुआ छवि के पापा की मुँहबोली बहन हैं। यहीं पड़ोस में रहती हैं। छवि अपनी इंजीनियरिंग...

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क्या शादी जरूरी है?

आज किसी का भी खाने का मन नही था। घर मे उदासी छाई थी। और सबसे ज्यादा उदास और दुखी थी रिया। आज फिर लड़के वालों ने उसे रिजेक्ट कर दिया था। स्वभाव से हँसमुख, मिलनसार प्रिया ने खुद को बाहरी दुनिया से अलग सा कर लिया था। आज उसे फिर अपने...

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हाइट छोटी हैं लेकिन सपने बहुत बडे़ हैं

"आ गई मेरी गुड़िया, कैसा रहा कॉलेज का पहला दिन? बहुत मजा आया होगा ना ,नये नये दोस्त बने होगें |" सरोज जी ने अपनी पोती पाखी से कहा | पाखी ने 12 th के बाद कॉलेज में एडमीशन लिया था और आज उसके कॉलेज का पहला दिन था |अपनी दादी...

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अपने पर शर्मिंदा क्यों होना?

 अपने पर शर्मिंदा क्यों होना? जब हम अपने प्रति सकारात्मक रहते हैं तो समाज भी हमारे प्रयासों की सराहना करता है।कोई भी पूर्ण नहीं होता, हर व्‍यक्ति में कोई न कोई कमी जरूर होती है। क्‍या कभी...

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तू है मेरी फनटसी

फिल्मों और मोडल्लिंग की दुनिया दुबली-पतली, साइज़ ज़ीरो वाले फिगर वाली कमसीन हसीनाओं के लिए विख्यात है। थोड़ा सा वजन क्या बढ़ा, कई हीरोइनों का तो मुंबई से बोड़िया-बिस्तर ही उठ गया। लेकिन इस चकाचौंध कर देने वाली ग्लेमरस दुनिया...

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हमें कुछ नहीं चाहिए

हमें कुछ नहीं चाहिए ,बस आप बारातियों का स्वागत पूरी गर्मजोशी के साथ कीजिएगा। जिससे हमारी बिरादरी में इज्जत बढ़ जाएगी। ऐसा कहना था पढ़े-लिखे नौकरी पेशा वाले सचिन के घर वालों का।सब कुछ था उनके पास, भगवान की दया से। बस कमी थी,...

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रंग की काली हूं मन की नहीं

आज लक्ष्मी को लड़के वाले देखने आ रहे थे। घर में चिंता का माहौल था कि इस बार भी लड़के वाले उसे पसंद करेंगे या नहीं। ऐसा नहीं कि उसमें कोई कमी थी, पढ़ी-लिखी तो वह थी ही, साथ ही सरकारी नौकरी भी करती थी। हां एक कमी थी, जो हमारे समाज...

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मैं सबसे अलग हूं

तीसरी कक्षा में लखन का एडमिशन जब मेरी क्लास में हुआ तो मुझे देखने में वह कुछ असामान्य सा लगा। कक्षा के सभी बच्चों से कद काठी में वह काफी छोटा था लेकिन उम्र में उनसे 2 साल बड़ा था। पैरों में भी उसके...

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