टैग : Patriarchal society

मैं पूछूं तो साला करैक्टर ढीला है !

चलिए अब बच्चों को थोड़ा अकेले में बात करने छोड़ देते है , इन दोनों को ही फैसला करना है। अपनी चाय का आखिरी घूंट भरते हुए श्यामनन्द जी (लड़के के पिता ) ने दुबे जी (लड़की के पिता ) से फ़रमाया। अब बस राकेश और सुधा कमरे में रह गए थे। राकेश...

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