टैग : Real life stories

मेरी यादगार मेट्रो यात्रा

अकेली मैं ही नहीं, बहुत से लोगों को आए दिन इस अनुभव से गुज़रना पड़ता है... मेट्रो सफर का मजेदार अनुभव आप सब के साथ सांझा कर रही हूँ... याद करके हँसी आती है... हा हा... दिल्ली तो कई  बार जाना हुआ लेकिन...

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सभी पिता हीरो होते हैं

पिता का होना क्या होता हैं।ये वो ही जानते हैं जिनके पिता नहीं हैं। जिनके पास हैं वो उनकी कद्र नहीं करते।पिता के बारे में ज्यादा कभी पढा़ नहीं और सुना नहीं ,मगर मैंने महसूस किया हैं। बात तब कि हैं जब मैं कक्षा 3 मैं थी। हम...

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हाय रे हाय एम. एड, ये मौसम और एम. एड

जब पहली बार एक लड़की अपने ससुराल जाती है तो वो अपने साथ कपड़े ,गहने, अपने हिसाब से अपने ज़रूरत का सारा समान लाती है। पर मेरे साथ इन सबके अलावा एक बैग और था ,वो था मेरी एम .एड की किताबो से भरा बैग… शादी के 15 दिन पहले...

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ससुराल में मेरा पहला दिन

बात मेरे ससुराल के पहले दिन की है।मेरी शादी 3 वर्ष पूर्व 28 फरवरी 2017 को हुई थी।हम लड़की वाले वृन्दावन से कोलकाता शादी करने आये थे।शादी पूरी तरह से मारवाड़ी तरह से हुई। कोलकाता की शादी उत्तर भारत की शादी से बिल्कुल उलट होती...

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कंजक पूजा और कन्या को हो जाये पीरियड्स !

कहते है छोटे बच्चों का मन बहुत कोमल होता है। बस एक महीना पहले ही  पीरियड्स आना शुरू हुए थे।  नवरात्री की धूम चारों ओर मची थी। बचपन में नवरात्री का आना जैसे दुनिया भर के पकवानो की खुशबू साथ ले आना। बाजार में माता की लाल...

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नहीं भूलता वह दिन

अपने पहले पीरियड की याद करते ही सिहर उठती हूँ । यह वो ज़माना था जब, इस तरह की बातों को करना घरों में वर्जित समझा जाता था । उन दिनों टेलीविज़न और मोबाइल न होने से इस तरह की बातों के लिए हमारा ज्ञान भी शून्य था । ...

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कहीं मैं मर गयी तो ?

१४ साल की उम्र और नौवीं कक्षा में वो भूगोल की क्लास मैं शायद कभी नहीं भूल पाउंगी। ब्लैकबोर्ड पर दुनिया का मानचित्र बन रहा था और मेरे मन के अंदर का भूगोल चिल्ला चिल्ला कर कह रहा था " नहीं इतनी जल्दी नहीं , अभी तो सारी दुनिया घूमनी...

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कुछ भी तो नहीं भूली मैं

जीवन में कई ऐसी घटनाएँ हैं जो आपके अतीत में घटित हुई परन्तु आज आपके वर्तमान में भी आप का दामन थामे हैं।  मेरा बचपन मुझे अच्छी तरह से याद है - वे गलियाँ, बेर-अमरूद के पेड़ , गली...

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कुछ भी तो नहीं भूली मैं

जीवन में कई ऐसी घटनाएँ हैं जो आपके अतीत में घटित हुई परन्तु आज आपके वर्तमान में भी आप का दामन थामे हैं।  मेरा बचपन मुझे अच्छी तरह से याद है - वे गलियाँ, बेर-अमरूद के पेड़ , गली...

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कोरोना वायरस और नारी की भूमिका

आज बहुत दिनों बाद कुछ लिख रही हूँ अभी हमारे लेडीज क्लब में निबंध प्रतियोगिता हुयी जिसका टापिक कुछ -कुछ मेरे शीर्षक से मिलता है | सच में इस मुश्किल समय में नारी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है चाहे वो घर के अंदर हो या घर के...

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