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पुन:कन्यादान

तेजस्वनी जी गहन विचार में डूबी हुयी किसी के आने का इंतजार कर रही थी कि अचानक से एक पहचानी सी आवाज़ ने उनका ध्यान भंग   कर  दिया, "नमस्ते आंटी! कैसी है आप? "  अपने स्वभाव के अनुरूप सिर हिला कर जवाब दे बोली, "देखो...

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