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बेआवाज़ स्त्री की आवाज ताराबाई शिन्दे

जब किसी ने यह तय किया कि औरतों को शब्दों से दूर रखा जाए, जब ये रिवाज हुआ कि औरत बाहर न निकले, घर और घर वालों में उलझी रहे सारी उम्र, तब उस पर क्या-क्या  बीती?इसका जवाब मिलना मुश्किल होता अगर औरतों ने अपने सत्य से अपना...

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