टैग : #ThursdayPoetry

बहु हूँ बेटी ना बन पाई

छोड़कर बाबुल का घर - अंगना पहुंची ससुराल की देहरी के लिएआंखों में भरे थे सपने हजारदिल में ढेर सारी प्रीत लिए भूल कर अपना बचपन...

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एक छोटा सा कोना, जो मेरा हो बस मेरा

बाबुल मै तुम्हारे घर में एक छोटा सा कोना चाहती हूँ , ताउम्र चाहती हूँ । जो ब्याह के बाद भी न हो पराया, वहां मेरी टूटी कांच की चिड़ियों से बनी माला का,  रंग बिरंगी, नयी पुरानी गुड़ियों का, ...

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तुम्हारे दिल में एक छोटा सा कोना चाहती हूं #Thursday Poetry

#thursdaypoetry 'छोटा सा कोना दिल में' चाहतीहूं एक छोटा सा कोना, तुम्हारे दिल में, क्योंकि, ये दिल ही तो है बसेरा, रहते हैं जिसमें, वे सभी जो होते हैं विशेष। एक छोटा सा कोना दिल...

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मन की आस- वो मेरा अपना कोना #ThursdayPoetry

तुम्हारे घर में एक छोटा सा कोना चाहती हूँ- माँ-बाबा मैं जानती हूँ,यह घर मेरा नहीं रहा अब लेकिन क्या करूँ मैं तो अब भी अपना मानती हूँ,जब तुम्हारे पास आती हूँ तो यहाँ सब कहते हैं बहू अपने घर जा रही है,जब वहाँ से...

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मेरा इक कोना चाहती हूं #Thursday Poetry

तुम्हारे घर में मैं अपना एक कोना चाहती हूं हां सच सुना तुमने मैं फिर से जीना चाहती हूं थक गई तुम्हारे घर को सजाते सजाते अब अपने कुछ खोए सपने सजाना चाहती हूं। घर की दहलीज से लेकर हर...

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हाँ, मेरे आने की ख़बर से कोई ख़ुश नहीं -जानती हूँ मैं #Thursday...

‘लड़की हुई है’ जब दादी ने उदास मन से सब को ख़बर सुनाई तो नन्ही सी जान भी उस उदासी से बेख़बर न रह पाई। पहचान गई वो सबके चेहरों की रंगत और साथ ही उन सब के मन के राज़। पर एक बात जो उसे परेशान किए जा रही थी...

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तेरे संग बिताए हर लम्हे को जहां संजो लूं

हां चाहती हूं मैं तेरे घर का एक कोना जैसी भी हूं सबसे जुदा हूं मैं ना मुझसे ऊपर कोई ना मुझसे अच्छा कोई ख्वाहिशों संग झूमती इतराती हूं मैं उषा की किरणों सी रक्तिमा फैलाती किसी की किरण हूं मैं तेरे...

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आज सपनों को हकीकत बनाना चाहती हूँ

कुछ यूँ तुम्हारे मकान को प्यार भरा मंदिर बनाकर अपनों के साथ प्यार की परछाई में रहना चाहती हूँ , एक पथरीली डगर है लड़कियों की जिदंगी एक अनजाना सफर भी है जिदंगी , छोड़कर बाबा का आंगना तुझ संग जिदंगी गुजारना...

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