तुमसे मिलने के इंतजार में...

तुमसे मिलने के इंतजार में...

मेरे प्यारे एसी...

बहुत दिन हो गए तुमसे बिछड़े हुए, इस गर्मी में मुझे अब पल पल तुम्हारी याद आती है। बिहार की घोर दुपहरी और रात की उमस वाली गर्मी मेरा सुख, चैन चुराती है। उस वक़्त तुम्हरा चेहरा मेरे आंखों के सामने नज़र आता है ,कब मिलूंगी तुमसे अब बस यही ख्याल मेरे ज़हन में आता है। 

जब भी यहां की गर्मी में मैं पसीने से तर-बतर हो जाती हूं तुम्हारे आगोश में आने को सच कहूं मैं तो छटपटा जाती हूं।

तुम मुझे मिस करते हो या नही वो मुझे नहीं पता पर मैं तुम्हें गर्मी के महीने में हर रोज याद करती हूं, तुम्हारी ठंडक पाने के लिए मैं तो रात भर करवट बदलती हूं। बिजली की स्थिति यहां बहुत अच्छी नहीं है , वोल्टेज भी रह रह कर तिलमिलाती है। इसलिए इस गर्मी में दूसरा एसी लेने से मन अभी भी घबराता है। तुम्हारी जगह कोई और होगा ये सोचकर दिल बैठ सा जाता है। मुझे तुम्हारी कितनी आदत हो गई थी ये मुझे तुमसे बिछड़ने के बाद समझ में आता है , तुम्हारी याद में जब तारे गिनती हूं तब तुम्हारे प्रति मेरा प्रेम सबको दिख जाता है।

तुम्हें देखने को अखियां तरस गई हैं ...तुम्हारी ठंडक पाने ने मन ललच रहा है पर क्या करूं ये दूरी मेरे लिए मजबूरी है पर तुमसे मिलना अब मेरे लिए बहुत जरूरी है। तुम्हारा ठंडा ठंडा एहसास तन बदन में सुकून भर देता था ।ज्येष्ठ की गर्मी में मुझे शिमला और मनाली की सैर करा जाता था। 

बस बहुत हुआ ,अब नहीं होता ये इंतजार !! ये मुआ कोरोना ही है हमारे बिछड़ने का असली गुनहगार। बस अब ये बूरा वक़्त गुज़र जाए , पहले जैसा था सब वैसा हो जाए ताकि मैं तुम्हारे पास लौट आऊं। इंतजार है अब की बच्चों का स्कूल खुल जाए ,लौट आए हम अपने आशियाने में और मुझे तुम्हारा ठंडा सा साथ मिल जाए।

              

 तुमसे मिलने के इंतजार में

                  तुम्हरी कविता


#अनोखीचिठ्ठी

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