तेरे अश्रु अब न बहेंगे #thursday poetry challenge कुछ तो लोग कहेंगे

तेरे अश्रु अब न बहेंगे #thursday poetry challenge कुछ तो लोग कहेंगे


तेरे अश्रु अब न बहेंगे

काम है उनका कुछ तो कहना
कुछ तो लोग कहेंगे
पर तू खुद को दे ये वचन तेरे अश्रु अब न बहेंगे

ये जग बैरी कुछ तो कहेगा
किसे इसने छोड़ा है
अग्नि परीक्षा बाद भी माँ सीता का घर तोड़ा है
तेरे आँसू जब भी बहेंगे दुनिया खुशी छुपाएगी
तेरे पास बैठ कर दो घड़ियाली आँसू बहाएगी
पीठ के पीछे तेरी ही पर खूब हँसी भी उड़ाएगी
क्यों इसको अवसर देना है
सहानुभूति तुझे क्यों चाहिए
अपना सम्बल तू बस खुद है
और कोई नहीं बल चाहिए
कभी कभी जीवन में सबको कठिन परीक्षा देनी पड़ती
दिल में दर्द भरा पहले ही बातें फिर भी सहनी पड़तीं
मुँह तो नहीं रुकेगा किसी का
कान भी कब तक बन्द करोगी
ताने देंगे वो चिल्ला कर
कब तक हाथ कानों पे धरोगी
कहने दो उन्हें जो कहते हैं उन बातों पर ध्यान न देना
व्यर्थ की बातें जो करते हैं बस तुम उन पर कान न देना

उतना ही सहना पड़ता है जितना सहते रहेंगे
बस तू खुद को वचन दे कि तेरे अश्रु अब न बहेंगे
कुछ तो लोग कहेंगे

अर्चना सक्सेना

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