तेरी तस्वीर

तेरी तस्वीर

चुराई थी मैने कभी तेरी एक तस्वीर  ,

याद आती है तब कर लेती हूँ दीदार,

तुमने बना नज़रे मिलाना बंद कर दिया, 

बना ली क्यूँ रिश्तों के बीच तुम ने दीवार।


अब न तुम से कोई बात होती है मेरी, 

अब न तुम से कोई मुलाकात होती है मेरी, 

आँखे इन्तजार करते करते थक जाती है, 

अब न तुम से कोई सवालात होती हैं मेरी। 

नज़्म में ढालूँ तो  रूठ जाते हैं अल्फ़ाज़, 

छीन लिया तूने तो अब बात करने का अधिकार, 

अल्फ़ाज़ो में खुशियाँ लाऊं तो भला कैसे लाऊं, 

दिल करता है कर लूँ तुझसे छोटी सी तक़रार। 

कुछ न सोचूँ कुछ न समझूँ करुँ मैं तुमसे बात, 

पर हो जाती हूँ बेबस कैसे करूँ मैं तुमसे बात, 

अधिकार तूने मुझे दिया ही नही ये कभी, 

दिल की चाहत तुझसे करूँ रात भर बात। 


जानते हो तुम सब कुछ पर तुम कुछ कहते नहीं 

खामोशीकी चादर ओढ ली तुम बहकते नहीं, 

ऐसा भी करता है अपने प्यार के साथ बताओ, 

अश्क भी रूठ गये मेरे वो तो अब बहते नहीं।। 

डाॅ राजमती पोखरना सुराना 



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