तेरा दायरा बेमिसाल है

तेरा दायरा बेमिसाल है


\"तेरा दायरा बेमिसाल है\"
विस्तृत है तेरी सोच का आसमान विरांगना सी छटा धर नारी तू भी कुछ कम नहीं तेरी शक्ति अपरंपार है..

तूने जीवन देखा है तुझ बिन संसार अधूरा है ध्वनियों का सार है तू खास है तू सारी खासियत तेरा प्रमाण है..

आह्वान कर आज़ादी का तेरा दायरा बेमिसाल है सीधी तान कर रीढ़ को चल कश्मकश की आदी न बन संकल्प लेकर साथ तू चल..

उर कोमल तेरा मन कोमल ममता तेरी पहचान है पर पिंडलियों को पिघलाकर हौसलों का तरकश तू सजा..

थकना नहीं तू आधे सफ़र पे झुकना नहीं दुनिया की डगर पे तम की घड़ीयाँ भी गुज़र जाएगी कल एक खूबसूरत सुबह खिलेगी..

विद्रोह की लाठी हाथ उठाकर रचनी है तुझे पूर्ण कहानी रुकना होगा मृत्यु की निशानी ज़िंदा होने का प्रमाण तू दे..

राह नाप ले कश्ती थाम ले दरिया गहरा पार करना है भोर की चौखट दूर नहीं तम का वितान तुझे चीर देना है..

बाँहें फैलाकर आसमान पर आदित अपना खुद लहरा सक्षम है तू आफ़ताब सी सुंदर सुबह का सपना सजा..

अबला से अब आग तू बन जा तारों की हर चाल बदलकर किस्मत अपनी खूद संवारे जीवन को उपवन सा बना..
भावना ठाकर \"भावु\" (बेंगलूरु, कर्नाटक)
#जनवरीकविताएँ

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