टीन एज़र्स के साथ रखें दोस्ती का रिश्ता

आजकल अधिकतर माता-पिता से एक ही बात सुनने को मिलती है कि हमारा बच्चा हमारी बात नहीं सुनता …वह हमारे आगे ज़ुबान चलाता है… वह अपनी हर बात मनवाता है …इत्यादि - इत्यादि।

टीन एज़र्स के साथ रखें दोस्ती का रिश्ता

आजकल अधिकतर माता-पिता से एक ही बात सुनने को मिलती है कि हमारा बच्चा हमारी बात नहीं सुनता …… वह हमारे आगे ज़ुबान चलाता है……. वह अपनी हर बात मनवाता है …..इत्यादि - इत्यादि।

जी हाँ….हम बात कर रहे हैं टीनएज़र बच्चों की। 

परंतु वास्तविकता तो यह है कि टीनएजर्स बच्चों को हैंडल करना इतना मुश्किल भी नहीं है जितना कि वह दिखाई देता है । यदि माता-पिता अपनी कुछ आदतों में बदलाव कर लेते हैं तो यह काफी आसान हो सकता है। 

पहले समय में बुजुर्ग टीनएजर बच्चों के लिए कहा करते थे कि यह तो बेलगाम अड़ियल घोड़ा है , इसकी लगाम कसने की जरूरत है… परंतु आज समय बदल गया है आज हम बच्चों की लगाम कस नहीं सकते ।

तो क्या किया जाए कि किशोरों को इस मुश्किल और चुनौतीपूर्ण अवस्था में सँभाला जाए क्योंकि इस अवस्था में हारमोंनल बदलाव होने के कारण बच्चे स्वयं भी तनाव-दबाव महसूस करते हैं ।

चलिए आज बात करते हैं ऐसी कुछ खास बातों की ओर जिन्हें यदि माता-पिता अपना लें तो काफी हद तक समस्या दूर की जा सकती है । 

* टीनएजर बच्चों में धैर्य बिल्कुल भी नहीं होता यदि माता-पिता और बच्चा दोनों ही धैर्य खो बैठेंगे तो बात सँभलने की बजाय बिगड़ जाएगी इसलिए माता-पिता को धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए। 

*इस अवस्था में बच्चों में काफी हार्मोनल चेंज़िस आते हैं जिस कारण उनका स्वभाव बिल्कुल बदल जाता है , चिड़चिड़ा हो जाता है । ऐसे में माता-पिता को बच्चों में होने वाले इस बदलाव को समझना जरूरी है ।

*यह बात बिल्कुल सही है कि टीनएज़र्स बच्चे बहस बहुत करते हैं । उनके पास माता-पिता की हर बात पर आगे से आगे जवाब हाजिर होता है । ध्यान रहे यह होना स्वाभाविक है । इस उम्र के बच्चों को गुस्सा आता ही है। माता-पिता गुस्से का जवाब गुस्से से ना दें  बल्कि यहाँ प्यार से ही स्थिति पर काबू पाया जा सकता है , जैसे आग को पानी डालकर ही बुझाया जा सकता है। 

*बच्चों को अक्सर माता पिता बिना जरूरत के सभी सुविधाएँ देते रहते हैं जिस कारण बच्चे के मन में नई से नई इच्छाएँ पैदा होती रहती हैं । अपनी हर इच्छा पूरी करवाने के लिए बच्चा जिद्दी होता रहता है । इसलिए माता-पिता बच्चों के सामने हर समय पैसों का दिखावा न करें बल्कि बच्चों को उनकी जरूरतों को समझने दें।  

*यदि आप बच्चों को सुविधाएँ उपलब्ध करवा देते हैं तो बच्चों को कुछ जिम्मेदारियाँ देना भी शुरू करें । इससे बच्चे भविष्य के लिए बेहतर तैयार होंगे ।

* यदि माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे उनके कंट्रोल में रहें तो माता-पिता को चाहिए कि बच्चे के साथ दोस्ती का रिश्ता रखें। बच्चे को घर में विश्वसनीय और मिलनसार माहौल दें। 

*इस उम्र में बच्चों को रोक-टोक तो बिल्कुल पसंद नहीं होती इसलिए बच्चों को किसी बात के लिए सीधा मना न करके कुछ ऑफर करते हुए मना किया जाए जैसे कि बच्चों को इस उम्र में ड्राइविंग और शॉपिंग बहुत पसंद होती है और यह उनकी फेवरेट होती है ।

*बच्चे के मनपसंद विषय पर बात करें ,जिससे बच्चा स्वयं को माता-पिता के नजदीक महसूस करें ।यदि आप एक बार बच्चे के दोस्त बन गए तो आपकी काफी समस्याएँ खत्म हो जाएँगी। 

*बच्चों को प्रेरित करने वाली सच्ची घटनाएँ बताएँ, जिससे उनमें भी करने की इच्छा जागृत हो ।

*माता-पिता को चाहिए कि वह बच्चों के साथ हर विषय पर खुलकर बात करें । चाहे कैसा भी सवाल हो , उनके हर सवाल का जवाब माता-पिता को देना चाहिए। 

जो साथ बच्चे का माता-पिता दे सकते हैं वह साथ कोई और नहीं दे सकता , चाहे उसका कोई दोस्त हो या सोशल मीडिया । 

अगर माता-पिता अपने बच्चे को बदलना चाहते हैं और उन्हें पहले स्वयं को बदलना होगा । यह समय की माँग है।  

उम्मीद करती हूँ कि यह लेख पढ़कर और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आप स्वयं में बदलाव करने के लिए सहमत होंगी।

धन्यवाद

Madhu Dhiman

Pink Columnist - Haryana

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