द फ़ेम गेम में माधुरी के जलवे!

द फ़ेम गेम में माधुरी के जलवे!

माधुरी दीक्षित, माधुरी दीक्षित क्यूँ है ये "द फ़ेम गेम" ने साबित कर दिया। इस वेब सीरीज़ में माधुरी दीक्षित को अदाकारी की परिभाषा कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्यूँकि एक तो 54 साल की उम्र में भी जो ग्लैमर को उन्होंने बरकरार रखा है मानना पड़ेगा, माधुरी से नज़र हटती ही नहीं। एक-एक सीन पर डायलोग डिलीवरी और हावभाव ने किरदार में जान ड़ाल दी है। इस रोल के लिए किसी और को हम सोच भी नहीं सकते।


सीरीज़ की बात करें तो पूरी कहानी और डायरेक्शन कम्माल का है। आप ब्रेक लेना चाहे तो भी नहीं ले सकते, इतना सशक्त काम किया है। कुल मिलाकर ये कह सकते है की "द फ़ेम गेम" में माधुरी ने अपनी करियर का बेस्ट परफॉर्मेंस दिया है।

माधुरी दीक्षित कथक नृत्य में पारंगत है, वह सिर्फ एक अदाकारा ही नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की डांसिंग डिवा भी हैं। उन्होंने अपने हिंदी फ़िल्मी करियर में कई बेहतरीन फ़िल्में की, जिन्हे दर्शक आज भी याद करते है। माधुरी को हिंदी सिनेमा में उनके बेहतरीन अदाकारी के लिये चार बार फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री, एक बार फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री और एक स्पेशल अवार्ड से नवाजा जा चुका है। इन सभी पुरुस्कारों के अलावा उन्हे भारत सरकार् के चतुर्थ सर्वोच्च नागारिक सम्मान "पद्मश्री" से सम्मनित किया गया।


"द फ़ेम गेम" की बात करे तो माधुरी का ये शो एक सुपरस्टार की कहानी बयाँ करता है, जो अपना स्टारडम छोड़कर एक दिन अचानक गायब हो जाती है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई सीरीज़ ‘द फ़ेम गेम’ में माधुरी ने अनामिका आनंद नाम की बॉलीवुड एक्ट्रेस का रोल निभाया है जो बहुत बड़ी सुपरस्टार है। फैन्स से लेकर पैपेराज़ी तक, सब उसकी एक झलक पाना चाहते है। ऑफ कैमरा वाली ज़िंदगी में अनामिका अपनी मां, पति और दो बच्चों के साथ रहती है, पिसती है। सामने से देखने पर उसकी ज़िंदगी में सब कुछ परफेक्ट लगता है, पर बड़े लोगों की ज़िंदगी कैसे भीतर से खोखली और तानों-बानों से उलझी होती है यही दिखाया गया है। एक दिन अचानक अनामिका अपना स्टारडम और अपनी फैमिली को पीछे छोड़कर गायब हो जाती है। वो कहां गई, उसके साथ क्या हुआ, ऐसे सवालों का जवाब जानने के लिए पुलिस अपनी जांच शुरू कर देती है, मीडिया अपना सर्कस, और फैन्स अपनी सोच और अनुमान लगाते है। शो के अंदर मौजूद किरदार और उन्हें देखने वाली ऑडियंस, दोनों को लगता है कि ये शो अनामिका कहां हैं के बारे में है, लेकिन ऐसा नहीं है। अनामिका के गायब होने वाला हिस्सा दिखाकर शो अपने मेन पॉइंट पर आता है, कि अनामिका कौन है, उसकी फैमिली, को-वर्कर्स और करीबी रहे लोगों से उसका रिश्ता किस तरह का है। जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है हमें अनामिका का आइडिया मिलने लगता है। अनामिका की रील लाइफ जितनी ब्राइट है, रियल लाइफ उतनी ही डार्क है।

फिल्म स्टार्स की लाइफ में तो क्या ऐश है यार’, शो इस सोच को तोड़ने की कोशिश करता है। तभी अनामिका की फिल्मी लाइफ को ब्राइट लाइट्स के ज़रिए कैप्चर किया गया, कि जैसे सारा जग रोशन है उसके लिए। लेकिन उसकी रियल लाइफ बिल्कुल अलग है, बच्चों के साथ मिसअंडरस्टैंडिंग हो, अपनी माँ से वैमनस्य हो या अपनी फीलिंग्स पर काबू न कर पाना, वो किसी नॉर्मल इंसान जैसी ही है। उसकी लाइफ में वो मसाला नहीं, जिसकी उम्मीद फैन्स करते है। रील और रियल लाइफ का कॉन्ट्रास्ट लाइटिंग के थ्रू दिखाया गया है। कभी लगता है स्टारडम टिकाने की जद्दोजहद और लाईम लाइट में रहने के लिए माधुरी गायब हुई होगी, कभी लगता है अपनी फ़िल्म को हीट करवाने की पब्लिसिटी होगी, तो कभी लगता है अपने परिवार और बच्चों के जीवन की प्रोब्लम सोल्व करने के लिए ड्रामा किया होगा। ये शो पूरी तरह से माधुरी दीक्षित और उनके किरदार अनामिका के आसपास घूमता है फिर भी सारे किरदार अपनी छाप छोड़ जाते है।


ग्लैमर से इतर ये शो फिल्मी दुनिया की असलियत को उजागर करता है। जैसे एक जगह डायलॉग है कि हीरो की एक टांग कब्र में है, और रोमांस अपनी बेटी की उम्र की लड़की से करना है, या फाइनैंसर का ये कहना हो कि फिल्में आर्ट नहीं हैं, बिज़नेस है। कुल मिलाकर ‘द फ़ेम गेम’ की यही शुरूआत हमें आख़िर तक जकड़ कर रखती है। खासकर माधुरी के फैन्स के लिए हर पहलू से दमदार ये सिरीज़ एक बार देखने लायक बनी है। शो के एंड से अंदाज़ा लग सकता है शायद दूसरा भाग भी बनेगा तो माधुरी जैसी अदाकारा को सौ सलाम।

भावना ठाकर \"भावु\" (बेंगलोर,कर्नाटक)

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