द कश्‍मीर फाइल्‍स का बिट्टा कराटे कौन है? जिसे कहा जाता था कश्मीरी पंडितों का कसाई

द कश्‍मीर फाइल्‍स का बिट्टा कराटे कौन है? जिसे कहा जाता था कश्मीरी पंडितों का कसाई

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' (The Kashmir Files) की रिलीज के बाद से बिट्टा कराटे चर्चा में हैं।

कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और पलायन पर बनी द कश्मीर फाइल्स लगातार सुर्खियों में बनी हुई है।


द कश्मीर फाइल्स के एक सीन में आतंकी संगठन के मुखिया से मीडिया की बातचीत का एक हिस्सा दिखाया गया है. जिसमें इंटरव्यू दे रहा आतंकी कश्मीरी पंडितों की हत्या की बात कबूल करता दिखाई पड़ता है. और, उसके चेहरे पर शिकन तक नहीं आती है।

ये कोई काल्पनिक दृश्य नहीं था. द कश्मीर फाइल्स में ये सीन फारुक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे नाम के एक आतंकी के इंटरव्यू से प्रेरित था. जिसने 20 कश्मीरी पंडितों की हत्या को खुलेआम कबूल किया था।


फिल्म में दिखाया गया यह इंटरव्यू सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है। उस इंटरव्यू में आप देख सकते हैं कि बिट्टा कराटे एक सवाल के जवाब में कहता है कि... अगर मुझे अपनी मां या भाई को भी मारने का आदेश मिलता, तो मैं उनकी हत्या कर देता. और, ऐसा करने से पहले मैं बिल्कुल भी नहीं हिचकता... 


 उसने ये बात असली इंटरव्यू में कही थी, कहा जाता है वो इस कदर कट्टर था कि किसी को मारने से पहले जरा भी नहीं सोचता था ।

इतना ही नहीं बिट्टा कराटे ने इंटरव्‍यू में यह भी कहा था कि उसने पाकिस्‍तान से 32 दिन की ट्रेनिंग ली और आतंकी बना। 

फिल्म में यह दृश्य देखकर आपके मन में भी यह सवाल जरूर आता होगा कि ये बिट्टा कराटे है कौन? क्या उसका यही असली नाम है? आजकल वो बिट्टा कराटे हैं कहां?


आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब-


बिट्टा कराटे का असली नाम फारूक अहमद डार है। बिट्टा कराटे जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट का चेयरमैन है। कश्मीरी पंडितों की हत्या करने बाद कराटे राजनीति में आ गया था। 

एक समय में बिट्टा कराटे घाटी में कश्मीरी पंडितों के लिए खूंखार नाम बन गया था और उसे "पंडितों का कसाई" कहा जाता था।

बिट्टा ने सबसे पहले अपने दोस्‍त और नौजवान कारोबारी सतीश कुमार टिक्‍कू को मौत के घाट उतारा। टिक्‍कू को उसके घर के सामने गोलियों से भून दिया गया था। कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि बिट्टा श्रीनगर की सड़कों पर घूमा करता था और कश्‍मीरी हिंदू नजर आते ही पिस्‍टल निकालकर मार देता था। 


 इंटरव्यू में बिट्टा कटारे ने कश्मीरी पंडितों की हत्या करने की बात कबूली थी, लेकिन बाद में वह अपनी बात से पलट गया था।


कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार करने वाला बिट्टा कराटे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन बाद में उसे जेल से रिहा कर दिया गया, क्योंकि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले थे। 

बिट्टा कराटे को पुलिस ने सबसे पहले जून 1990 में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार होने के बाद कराटे 2006 तक जेल में रहा। इसके बाद उसे जमानत मिल गई।


जेल से छूटने के बाद बिट्टा जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलफ) में शामिल हुआ। पुलवामा हमले के बाद बिट्टा को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत कार्रवाई करते हुए टेरर फंडिंग के आरोप में 2019 में एनआईए (एनआईए) ने गिरफ्तार किया था।

फिलहाल वो तिहाड़ जेल में बंद हैं।

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