दो महिला किरदारों की कहानी जलसा: Movie Review

दो महिला किरदारों की कहानी जलसा: Movie Review

विद्या बालन की फिल्म ‘डर्टी पिक्चर’ को 10 साल से ज्यादा हो गए। कोरोना में लॉकडाउन लगा तो उनकी पिक्चर ‘शकुंतला देवी’ प्राइम वीडियो पर ‘गुलाबो सिताबो’ के बाद सबसे ज्यादा देखी गई फिल्म बनी। फिर ‘शेरनी’ में वह दहाड़ीं और अब अभिनय का उनका ये नया ‘जलसा’ है। साथ में हैं  उनके शेफाली शाह ।

जलसा सुनकर लगता है होगा  कोई उत्सव, कोई आयोजन, कोई विशाल सभा. लेकिन  इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है. तनाव भरी कहानी के आखिरी क्षणों में जब नायिका हैरान-परेशान लौट रही है, तो एक कारोबारी-नेता के जन्मदिन का छोटा-सा जुलूस सड़क पर निकल रहा है और वहां स्क्रीन पर टाइटल चमकता है, जलसा।

जलसा के बारे में विद्या बालन कहती है
जलसा जहां बहुत लोग जुड़ते हैं। असल में हमारी फिल्म में कई विडंबनाएं भी हैं। मैं अपने निर्देशक सुरेश त्रिवेणी के शब्दों में कहूं तो एक हादसा होता है और उसका असर बहुत लोगों पर पड़ता है। गाड़ी के नीचे एक आता है, मगर कई लोग कुचल जाते हैं। जरूरी नहीं कि जलसा में हमेशा जश्न ही हो। यह जिंदगी की त्रासदी भी हो सकती है।

दो महिला किरदारों कहानी कहती है जलसा।

जलसा' की कहानी अपराधबोध, आत्मविश्लेषण और मानवीय व्यवहार की पेचीदगियों के इर्द-गिर्द घूमती है। 

फिल्म कहानी की शुरुआत एक दिल दहलाने वाली वारदात के साथ होती है. इसमें दिखाया जाता है कि एक कपल देर रात बाइक से घूम रहा होता है. इसी बीच लड़की अचानक तेजी से आती हुई एक कार के सामने आ जाती है. इस भयंकर हादसे में लड़की बुरी तरह घायल होती है. बाद में पता चलता है कि हादसा करने वाली कार को एक मशहूर महिला पत्रकार माया मेनन (विद्या बालन) चला रही होती है. हादसे की शिकार लड़की उसके घर काम करने वाली हाऊस मेड रुखसाना (शेफाली शाह) की बेटी होती है।

हादसे की रात अपने बेबाक इंटरव्यू में रिटायर चीफ जस्टिस की बखिया उधेड़ने के बाद माया अपने घर लौट रही होती है, तभी कार चलाते हुए झपकी आ जाती है. इसी दौरान ये हादसा हो जाता है. माया का एक बेटा होता है, जो एक ऑटिस्टिक (मानसिक बीमारी) होता है. उसका पति तलाक के बाद अपनी अलग दुनिया बसा चुका है. लेकिन बेटे से मिलने आता रहता है.रुखसाना माया के बच्चे का बहुत ध्यान रखती है. यहां तक कि उसके खुद के दो बच्चे होते हैं. लेकिन वो उनको अकेला छोड़कर माया के बच्चे के साथ ही रहती है. इस दौरान उसकी अपनी बेटी उसके हाथ से निकलती जाती है. बेटा भी उसकी बात नहीं मानता. लेकिन इतना सबकुछ होने के बाद भी वो माया के परिवार को अपने परिवार की तरह देखभाल करती है।

 ऐसे में रुखसाना की बेटी जब माया की कार से घायल हो जाती है, तो उसकी जिंदगी मिनटों में बदल जाती है।

विद्या बालन और शेफाली शाह की बेहतरीन अदाकारी के लिए जरूर देखिये जलसा ।

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