देखो होली आई

देखो होली आई

देखो देखो होली आई

बच्चे बूढ़े और जवान 

सबके चेहरे पर है खुशियां छाई‌

आओ सब मिलकर खेलें रंगों का त्योहार

अबीर, गुलाल और रंगों से करते हैं एक-दूसरे को सराबोर

मन को बहुत लुभा रही फागुन की मदमस्त बयार

हवा की ठंडी-ठंडी सिहरन से पुलकित हो रहा संसार

हरे रंग से सजी है धरती, नीला अंबर करें मनुहार

सतरंगी रंगों से मुझे भी रंग दो, सुन ऐ बादल महाराज

रंगों की सतरंगी बौछार देखकर सबका मन है डोल रहा

होली मिलजुल कर मनाएंगे सबकी जुबां अब यही बोल रहा

गुझिया , पापड़ पकवानों से सज रही होली की महफ़िल

इस महफ़िल में हम चार चांद लगाएंगे

रंगों की टोली संग मिलकर हम तो धमाल मचाएंगे

यारों संग धूम मचाएंगे,गली का बच्चा - बच्चा बोल रहा

मिटाएंग दिलों की दूरियां मन में यही भाव है उमर रहा 

देखो देखो आ रही रंगों की मदमस्त टोली

सबकी जुबां पर बस एक ही बोली

आपस में भाईचारा फैलाएंगे

ऊंच - नीच और जात पात का भेद मिटाकर

हम रंग बिरंगी होली मनाएंगे

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