दूल्हा चढ़ा गधी: एक अनोखा रिवाज़

दूल्हा चढ़ा गधी: एक अनोखा रिवाज़

वैसे तो हम सब जानते हैैं हर परिवार में विवाह से संबंधित अलग-अलग रिवाज़ होते हैं। लेकिन इस रिवाज़ के बारे में मैंने अपने ही विवाह में जाना था, जो मेरे ससुराल से संबंधित था। 


विवाह उपरांत जब मुझे पता चला कि दूल्हे राजा को घोड़ी पर बैठाने से पहले गधी पर बैठाया जाता है, तब मैं हँस-हँस कर लोट-पोट हो गई। 


फिर सासू माँ ने बताया कि उनके यहाँ इसे शुभ माना जाता है।और मेरी शादी में तो वो लोग कुम्हार को बोलना ही भूल गए थे कि फलां दिन गधी चाहिए, जब सब तैयार हो गए तो बारात निकलवाने से पहले याद आया।


आनन-फानन में जेठ जी को कुम्हार के यहाँ भेजा गया, पता चला कुम्हार तो घोड़े बेचकर सो रहा है। जेठ जी ने उसे उठाया तो वो आँखे मलता हुआ उठा और बड़ी मुश्किल से कुछ ज्यादा पैसे लेकर उसी समय के लिए उसने गधी को तैयार किया और जेठ जी के साथ चलने को तैयार हो गया।


अब मैं अपनी आँखों के समक्ष वो दृश्य सोचने लगी जब मेरे पतिदेव उस गधी पर बैठे हुए थे, बेचारी छोटी सी गधी और इतने बड़े इंसान उस पर बैठे हुए कैसे लग रहे होंगे, मुझे यह सोचकर फिर हँसी आ गई। 


लेकिन उस वक्त मेरे ससुराल पक्ष के जान में जान आ गई थी, जब मेरे जेठ जी गधी को लेकर घर के द्वार पर पहुँचे।

लेकिन मजाक से परे अगर कहूँ कि अपने रिवाज़ों के लिए ना जाने कितने मासूम और मूक जानवरों को आए दिन हमलोग परेशान करते रहते हैं तो क्या यह सही बात है? और कुछ रिवाज़ तो ऐसे होते हैं जिनका कोई सिर-पैर ही नहीं होता।


अब गधी पर बैठना क्यों शुभ माना जाता है मुझे नहीं पता।बस बड़े करते आ रहे हैं तो करना जरूरी है और ऐसा ना करने से भगवान ना करे कुछ गलत हो जाए तो मन में एक वहम भी बैठ जाता है।


मैंने घर पर कहा तो बोले कि गधी और गधे को तो बोझा ढ़ोने के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है, तब भी उन्हें परेशानी होती होगी, हमने तो सिर्फ दो मिनट अपनी मान्यता पूरी करने के लिए ऐसा किया।


अब अपनी जगह वो सही हैं, लेकिन अगर सब ऐसा सोचेंगे तो शुरुआत कहाँ से होगी????


मैं सोच ही रही थी कि नन्द ने कहा भाभी इतना मत सोचो, कल को जब मेरे भतीजा होगा तब आप ही उसके विवाह में सबसे पहले गधी को आमंत्रित करते हुए दिखाई दोगी। इतना कह वो वहाँ से मुस्करा कर चली गई और मैं बस शर्मा कर रह गई। लेकिन वो सही ही तो कह रही थी, हर माँ अपने बच्चों का शुभ ही तो चाहेगी और तब हम सब यह अच्छा-बुरा भूलकर बस थोड़ा सा स्वार्थी हो जाते हैं। 


आपको मेरा यह लेख कैसा लगा बताइएगा जरूर।


✍शिल्पी गोयल

#वेडिंगसीज़न

What's Your Reaction?

like
2
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0