दलाई लामा जिनसे चीन भी घबराता है - Dalai Lama Birthday

दलाई लामा जिनसे चीन भी घबराता है - Dalai Lama Birthday

दुनिया भर में कई ऐसी शख्सियतें हुईं है जिन्होंने अपने व्यक्तित्व से पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं दलाई लामा। 


दलाई लामा बौद्ध मतावलंबियों के धर्मगुरु हैं। आज 14वें दलाई लामा का जन्मदिन है। वर्तमान दलाई लामा आज 85 साल के हो गए हैं। 61 साल पहले चीन की वजह से तिब्बत छोड़ने वाले दलाई लामा तब से भारत में ही रह रहे हैं।


क्या आप जानते है दलाई लामा और लामा क्या हैं और इनमें अंतर क्या है। दरअसल लामा का अर्थ होता है बौद्ध साधु। जीवन का सच खोजना यानी असली ज्ञान पाना इनका लक्ष्य होता है, जिसके लिए यह कड़ा तप करते हैं। वहीं, दलाई लामा लामाओं में सबसे उच्च होते हैं। बौद्ध मान्यता है कि दलाई लामा हर बार मृत्यु के बाद पुनर्जन्म लेते हैं। और उन्हें ही दोबारा दलाई लामा चुना जाता है। बौद्ध मान्यता के अनुसार दलाई लामा कभी मरते नहीं। वह पुनर्जन्म लेते हैं। माना जाता है कि किसी दलाई लामा की मृत्यु के बाद उनका पुनर्जन्म होता है। धर्म अधिकारी नए दलाई लामा की खोज करते हैं और उसे ही अगला दलाई लामा नियुक्त किया जाता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि दलाई लामा का चयन नहीं किया जाता बल्कि उन्हें खोजा जाता है।


आपको पता है 85 साल के इस बुज़ुर्ग से चीन इतना चिढ़ा क्यों रहता है? जिस देश में भी दलाई लामा जाते हैं वहां की सरकारों से चीन आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताता है. आख़िर ऐसा क्यों है?


चीन दलाई लामा को अलगाववादी मानता है. वह सोचता है कि दलाई लामा उसके लिए समस्या हैं।चीन की तिब्बत पर कब्जे की गुस्ताखी के बाद भारत में दलाई लामा को आए हुए 62 साल से ज्यादा हो गए हैं। यानी तिब्बत की आजादी के लिए संघर्ष करते हुए आधी सदी से ज्यादा खर्च हो गई। संघर्ष का जो रास्ता उन्होंने 23-24 वर्ष की आयु में चुना, उससे वह आजीवन टस से मस नहीं हुए।


बौद्ध धर्म के अनुयायी दलाई लामा को एक रूपक की तरह देखते हैं. इन्हें करुणा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है.

दूसरी तरफ़ इनके समर्थक अपने नेता के रूप में भी देखते हैं. दलाई लामा को मुख्य रूप से शिक्षक के तौर पर देखा जाता है. लामा का मतलब गुरु होता है. लामा अपने लोगों को सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते हैं।


वे तिब्बत की स्वायत्तता के लिए अपना सबकुछ न्योछावर करने को तैयार हैं। तिब्बत की आजादी के लिए अपनी जन्मभूमि तक छोड़ने को तैयार हैं दलाई लामा।

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