दीप सजे मेरे अंगना

दीप सजे मेरे अंगना


अद्भुत छटा बिखेरती यह रात ,कुछ मतवाला कर गयी
ऊपर तो थे ही सितारे ,धरा को भी सितारों से भर गयी
झिलमिल सितारों का आँगन, मन में उमंग भर गया
लौ टिमटिमाती अँगना में, मन में उजाला भर गया
दीपों की आवली यह ,घर-घर को करती रोशन
वक्त काश ऐसा आए, हर दिल को कर दे रोशन
छल, कपट, असत्य का, बढ़ता यह बोलबाला
घर तो किए हैं रोशन, पर मन भी न हो काला
तमसो मा ज्योतिर्गमय, के भाव हो जाएँ सार्थक
जग में किसी के लक्ष्य, न हों कभी निरर्थक
हैं पर्व खुशियों के ये, खुशियाँ ही नजर आएँ
चलो, प्रेम और सौहार्द से, दिल रोशन करके आएँ
मिलकर जो मना लेंगे, दीपों की ये दीवाली
अंगना तो रोशन होगा, मन में भी खुशियाँ आलीं
तो क्यों न मन को भी अपने, हम दीप से सजा लें
बाहर तो दीप हजारों, एक से हम मन जगा लें
दीप सजे मेरे अंगना आज, मन प्रफुल्लित है यह
है झिलमिल सितारों का आँगन, प्रतीत मुझको है यह ।


आभा कुदेशिया

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