दस्तूर दुनिया का #Thursdaypoetrychallenge

दस्तूर दुनिया का #Thursdaypoetrychallenge

अपनी शानो-शौकत ना दिखाकर

गर ना करी आलीशान शादी

दबी आवाज में कानाफूसी करके

कुछ तो लोग कहेंगे


नाती-नातिन के जन्म लेने पर

गर ना दिया छूछक भारी

कटाक्ष भरी मीठी वाणी से 

कुछ तो लोग कहेंगे


बेटी के मायके में आकर

कुछ दिन ज्यादा रूक जाने पर 

वजह जानने की फिराक में

कुछ तो लोग कहेंगे


बेटी को बेटे की तरह मानकर

गर दे दिए उसको अधिकार बराबर 

प्रश्नों की झड़ी लगाकर 

कुछ तो लोग कहेंगे


जात-पात का भेद मिटाकर 

गर किसी से दिल को लगाया

लोक-लाज की दुहाई देकर 

कुछ तो लोग कहेंगे


मेहमानों के आ जाने पर 

गर ना करो मनोवांछित खातिरदारी 

मेहमान-नवाजी का सलीका बताकर 

कुछ तो लोग कहेंगे 


काम करो जब लीक से हटकर 

गर उसमें सफल न हो पाओ

हंसी-ठिठोली से मजाक उड़ाकर 

कुछ तो लोग कहेंगे 


अपनी मेहनत और लगन के दम पर 

आसमान को जब तुम छू लोगे 

तारीफों के झूठे पुल बांधकर 

कुछ तो लोग कहेंगे


ये तो दस्तूर है दुनिया का

चाहे बुरा या अच्छा कर लो

मनमुताबिक जब ना हो लोगों के

कुछ तो लोग कहेंगे


लोगों का काम तो है कहना

करो वही जो दिल चाहे करना


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