दादी का नया जन्म

दादी का नया जन्म

सरोज ज़ी ड्राईवर रघु के साथ शॉपिंग माल में कुछ खरीददारी करने गयी हुई थी| सारी खरीददारी करके जैसे ही निकली तो बेटे राजीव का फोन आ गया, "माँ मुबारक हो आप दादी बन गयी है |"

"अच्छा बता क्या हुआ? बहू ठीक है ना!" सरोज ने उत्सुकता से पूछा |

"हाँ माँ! लक्ष्मी आई है | शुचि भी ठीक है |" राजीव ने बताया |

 रघु ने भी बधाई दी | उसी समय बेटी का फोन आया, "माँ मैं बुआ बन गयी |"

"हाँ बेटा! पोता होता तो बहुत बड़ी पार्टी रखती पर चलो कोई नहीं आजकल तो बेटा बेटी बराबर होते हैं | अगली बार पोता होने पर तुझे सोने का सेट ले कर दूँगी |" सरोज ज़ी बोली |

  कुछ महीनों बाद, सुबह-सुबह रघु मिठाई का डिब्बा लेकर सरोज ज़ी के पास पहुँचा," मालकिन मुँह मीठा कीजिए | मैं फिर से पापा बन गया |"

" अरे वाह! चल लड़का हो गया तेरा परिवार पूरा हो गया|" सरोज ज़ी मिठाई का डिब्बा पकड़ते हुए बोली,

" तो बेटा और तेरी बीवी ठीक हैं ना |"

"मालकिन! बेटा नहीं मेरे घर बेटी हुई है |" रघु बोला |

"पर तेरे घर तो पहले भी एक लड़की है ना? इस महँगाई और गरीबी में दो दो लड़कियाँ और फिर भी तू मिठाई बाँट रहा है |" सरोज हैरान हो कर बोली |

"मालकिन लड़का हो या लड़की, उनके लालन-पालन में खर्च तो बराबर ही होता है और आजकल तो लड़कियाँ पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने माता पिता का नाम भी रोशन करती है | 

मेरी बेटी तो नवरात्रि के दिनों में आयी है सो वो तो मेरे लिए बहुत भाग्यशाली है |अब मुझे आप एक सप्ताह की छुट्टी दे दो आज थोड़ी बहुत खरीदारी करूँगा और कल गाँव जाऊँगा, आखिर वहाँ भी तो सब जश्न के लिए मेरा इंतजार कर रहे होंगे |" एक दसवीं पास ड्राईवर रघु ने शिक्षित संभ्रांत सरोज की आँखे खोल दी थी |

"अरे तेरी बेटी के लिए तोहफे मैं खरीद कर दूँगी | तू गाड़ी निकाल |" रास्ते में सरोज ने राजीव को फ़ोन किया," बेटा दस दिन बाद मेरी पोती तीन माह की हो जाएगी, उस दिन एक जोरदार पार्टी करेंगे |" आज सरोज ने रघु की बेटियों के लिए तोहफे लिए और साथ ही साथ अपनी बेटी और बहू के लिए सोने के जेवर भी |

 सरोज ज़ी को ऐसा लगा मानो आज ही वे पहली बार दादी बनी है |

दोस्तों य़ह एक सत्य कहानी है, बस पात्रों के नाम बदल दिए गए है | आज भी आधुनिक पीढ़ी की सोच में परिवार में लड़की के पैदा होने पर वो उत्साह नहीं दिखाई देता | आवश्यकता है सोच को बदलने की | सिर्फ किताबों, किस्सों-कहानियों में बात करने से समाज नहीं बदलेगा | उसके लिए आवश्यक है नजरिए को बदलने का...

उम्मीद है कि य़ह स्व रचित अप्रकाशित कहानी आप सब को पसन्द आएगी और आपकी सोच को एक नया नजरिया देगी |

# दिल से दिल तक # पूजा अरोरा 

# कन्या 

  

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