दादी,की प्रग्नेंसी में जलेबी खाने का मन

दादी,की प्रग्नेंसी में जलेबी खाने का मन

"नील उठो न, मुझे आइसक्रीम खानी है !! अभी!! "

नेहा ने सोते हुये अपने पति को झिझोंड़ते हुये कहा।

नेहा के यू हिलाने से नील आँखे मलते हुये बोला ........

" यार इतने सी बात के लिये मुझे क्यों उठा रही हो। जाकर फ्रिज से निकाल कर खा लो। "

और वहीं के वहीं दुबारा  लुढ़क गया।

नेहा ने इसबार  नील को और जोर से हिलाते हुये बोला... "नहीं है फ्रिज में। मै अभी देख कर आई हूँ। तभी तुम्हे उठाया है। चलों न हम बाहर से खा के आते है।

नेहा ने बच्चों की तरह जिद करते हुये कहा।

नील ने घड़ी देखी रात के 11:30 बजे है। इस समय आइसक्रीम?? उसने नेहा को मनाने की कोशिश की... सुनो न में तुम्हे सुबह आइसक्रीम खिलाता हुँ न नास्ते के समय। पर अभी तुम सो जाओ ।

नील की बात सुन नेहा बिना कुछ बोले करवट लेकर लेट गई। अब नील को भी कैसे चैन पड़ता। तो चल दिया अपनी बीबी को आइसक्रीम खिलाने।

नेहा की चार महीनें की प्रग्नेन्सी है। तो उसका यू ही कभी भी कुछ खाने का मन हो जाता। और नील अच्छा पति बन उसकी हर  इच्छा पूरी करने की कोशिश  करता है। वो ही नहीं उसका पूरा परिवार माँ, दादी माँ, पापा सभी उसका पूरा ख्याल रखते है।

पर इतनी रात में नेहा को बाहर ले जानें के लिये शायद कोई तैयार ही न हो। इसीलिये दोनों धीरे - धीरे बिना आवाज किये दरवाजे पर पहुंचे। तभी पीछे से दादी माँ की आवाज आई......

"इतनी रात को ये सवारी कहाँ चल दी"??

दादी ..... दादी वो......डर के मारे नील की आवाज हलक में अटक गई।

तभी दादी ने मुस्कराते हुये कहा" नेहा का कुछ खाने का मन है। और तुम उसे खिलाने जा रहे हो। और उँगली हिलाते हुये पूँछा..... है,,, न,,,,,,??

जी दादी नेहा का आइसक्रीम खाने का मन हो रहा है। तो वहीं जा रहा था।

दादी ने गुस्सा होने की जगह नेहा को प्यार करते हुये कहा "तुम दोनों को अकेले देख कहीं पुलिस वाले कुछ पूंछने न लगे चल मै भी तुम्हारे साथ चलती हूँ।

तभी पीछे से माँ भी आ गई। और अपनी सास को ये दिखाने के लिये की वो उनसे कहीं ज्यादा अच्छी सास है। वो भी साथ चल दी।

घर की तीनों महिलाओं को ले जाने की बात पापा को बता नील आइसक्रीम पार्लर पहुँच गया। जो बस बंद ही होने वाला था। पर नील के कहने से उसका मालिक थोड़ी देर और रुक गया।

सभी ने अपनी - अपनी पसन्द की आइसक्रीम ले ली। नेहा के चेहरे पर इतनी खुशी देख नील ने यू ही अपनी माँ से पूँछा "माँ क्या आप को भी ऐसे कभी भी कुछ भी खाने का मन हो जाता था ?

तो उन्होंने मुस्करा कर हाँ में सर हिलाते हुये कहा.... " हाँ बेटा एक प्रग्नेंट लेडी का मन ऐसे ही चंचल हो जाता है। कभी कुछ चटपटा खाने का मन हो जाता है। तो कभी मीठा। और थोड़ा उदास हो कर कहा..... पर सब की इच्छा पूरी हो ये जरूरी नहीं है । "

तभी नेहा ने दादी माँ से पूँछा...... "दादी आपकी भी ऐसी इच्छा होती थी?

दादी ने भी हाँ में सर हिलाते हुये बोली.... " हाँ बेटा एक बार हुआ था जलेबी खाने का मन। तो मैने तुम्हारे दादा जी से कहा "सुनिये मेरा जलेबी खाने का बड़ा मन हो रहा है। तो क्या आप मेरे लिये जलेबी ला देंगे। "

तो तुम्हारे दादा जी गुस्से में बीच आंगन में खड़े हो चिल्लाये

"माँ  गाँव के सबसे बड़े हलवाई को बुला लो। आज तुम्हारी बहू का जलेबी खाने का मन हो रहा है। "

और मेरी सास ने मुझे मेरी इच्छा बताने की सजा के रूप में मुझसे पूरे घर के लिये जलेबी बनवाई । जिन्हें बनाते - बनाते जलेबी खाना तो छोड़ो पानी तक पीने की इच्छा खत्म हो गई।

उसके बाद मैने अपनी तो सारी  इच्छाएं मार ली  । और अपने बेटें को इस लायक बनाया कि वो शहर जा कर नौकरी करे। और अपने साथ अपनी बीबी को भी ले जाये ताकि उसे गाँव में रह कर अपनी इच्छाओं का दमन न करना पड़े।

पर मेरा बेटा दादी भक्त निकला अपनी बीबी को उनके कहने पर वहीं गाँव में छोड़ खुद शहर आ गया। मैने बहुत समझाने की कोशिश की पर उसपर कोई असर न हुआ।

तो मैने दूसरा तरीका अपनाया जब तू अपनी माँ की कोख में आया तो मैने तेरी माँ को इतना परेशान किया कि ये मेरे डर की वजह से अपने पति के साथ शहर आ गई। दुख तो था मुझे इस बात का कि मेरी बहू की पहली संतान और मै उसके साथ नहीं हुँ। पर कहीं न कहीं ये सोच कर खुशी भी मिलती थी कि कम से कम मुझसे और गाँव की पिछड़ी सोच से दूर रह कर ये अपनी पसन्द से खा ,पी सकेंगी। और जब मन होगा तो काम करेगी । जब मन होगा आराम करेगी। *

पर उन सब बातों को तुम्हारी माँ ने अभी तक दिल से लगा रखा है। इसीलिये तेरा ख्याल रखने के बहाने मुझे दिखाती और सुनाती रहती है। कि वो मुझसे अच्छी सास है। "

इतना बोल दादी चुप होकर अपनी आँखों में आये आँसुओ को अपने साड़ी के पल्लू से साफ करने लगी।

तभी नील की माँ उठकर अपनी सास के गले लग बोली

"मुझे माफ करदो माँ जी। मैने कभी ऐसे सोचा ही नहीं मुझे तो यही लगा की आप एक कट्टर सास हो जो अपनी बहू को कभी खुश नहीं देख सकती।

पर आज जाना की उस कठोर चेहरे के पीछे मेरे लिये आपने कितनी चिन्ता कितना प्यार छुपाया हुआ था। "*

तभी नेहा ने सास और दादी सास के मुँह में आइसक्रीम डालते हुये खुशी से चिल्ला कर कहा..... "हे हे... मेरी दोनों सासो का झगड़ा खत्म हो गया। इसी खुशी में एक  - एक आइसक्रीम और हो जाये। "

तो दोनों सास नेहा को ऐसे चिल्लाने पर डांटने लगी। तो नेहा ने अपने मुँह को किसी मासूम बच्चे की तरह बना कर बोली....." मेरी सास तो सिर्फ नम्बरी है। पर दादी सास तो दस नम्बरी निकली। "

उसकी इस बात पर दोनों सास ,बहू ने नेहा के कान खींच दिये। और नील ने इस लम्हें को अपने मोवाइल के कैमरे में कैद कर इसे कभी न भूलने वाला पल बना दिया।

तो सखियों मेरी ये कहानी आपको कैसी लगी। लाइक, कॉमेंट करके जरूर बताइयेगा।

अगर इसमें कोई गलती हुई हो तो उसके लिये में  क्षमा प्रार्थी हूँ । 

              धन्यवाद!!

आपकी दोस्त:- अनिता शर्मा!!

# मातृत्व # writing challenge

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