देवताओं के वास्‍तुकार भगवान विश्‍वकर्मा के बारें में जानतें हैं?- Blog post by Anu Gupta

देवताओं के वास्‍तुकार भगवान विश्‍वकर्मा के बारें में जानतें हैं?- Blog post by Anu Gupta

भगवान विश्‍वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्‍तुकार माना जाता है।पौराणिक काल के सबसे बड़े सिविल इंजीनियर माने जाने वाले भगवान विश्‍वकर्मा की जयंती हर साल मनाई जाती है।


मान्‍यताओं के अनुसार हर साल कन्‍या संक्रांति के दिन विश्‍वकर्मा जयंती मनाई जाती है और यह लगभग प्रत्‍येक वर्ष 17 सितंबर को ही होती है।


माना जाता है कि भगवान विश्‍वकर्मा ने ही इंद्रपुरी, द्वारिका, हस्तिनापुर, स्‍वर्गलोक, लंका और जगन्‍नाथपुरी का निर्माण करवाया था। उन्‍होंने ही भगवान शिव का त्रिशूल और विष्‍णु भगवान का सुदर्शन चक्र तैयार किया था।


यही वजह है कि सभी इंजीनियर और तकनीकी क्षेत्र से जुडे़ लोग विश्‍वकर्माजी को अपना भगवान मानते हैं और हर साल विश्‍वकर्मा जयंती पर उनकी पूजा करते हैं।


एक कथा के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में सर्वप्रथम \"नारायण\" अर्थात साक्षात भगवान विष्णु सागर में शेषशय्या पर प्रकट हुए. उनके नाभि-कमल से चर्तुमुख ब्रह्मा दृष्टिगोचर हो रहे थे. ब्रह्मा के पुत्र \"धर्म\" तथा धर्म के पुत्र \"वास्तुदेव\" हुए. कहा जाता है कि धर्म की \"वस्तु\" नामक स्त्री से उत्पन्न \"वास्तु\" सातवें पुत्र थे, जो शिल्पशास्त्र के आदि प्रवर्तक थे. उन्हीं वास्तुदेव की \"अंगिरसी\" नामक पत्नी से विश्वकर्मा उत्पन्न हुए. पिता की भांति विश्वकर्मा भी वास्तुकला के अद्वितीय आचार्य बने।


वाल्मीकि रामायण के अनुसार सोने की लंका का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था।


 महाभारत के अनुसार, तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली के नगरों का विध्वंस करने के लिए भगवान महादेव जिस रथ पर सवार हुए थे, उस रथ का निर्माण विश्वकर्मा ने ही किया था। वह रथ सोने का था। 


विष्‍णु पुराण में विश्‍वकर्मा को \"देव बढ़ई\" कहा गया है. यही वजह है कि हिन्‍दू समाज में विश्‍वकर्मा पूजा का विशेष महत्‍व है।


इस दिन मशीनों, दफ्तरों और कारखानों की सफाई की जाती है. साथ ही विश्‍वकर्मा की मूर्तियों को सजाया जाता है. घरों में लोग अपनी गाड़‍ियों, कंम्‍प्‍यूटर, लैपटॉप व अन्‍य मशीनों की पूजा करते हैं. मंदिर में विश्‍वकर्मा भगवान की मूर्ति या फोटो की विधिवत पूजा करने के बाद आरती की जाती है।

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