दायित्व बोध

दायित्व बोध

#thursdaypoetry

# पोएट्री चैलेंज

#आजादी



आजादी का सही मायने में समझना हमें अर्थ है
नहीं  होने देना शहीदों के बलिदान व्यर्थ हैं
फूल बनाकर मस्तक के जिन्होंने भारत मां को चढ़ाएं
पूछो उन मांओं के दिल से जिनके लाल लौट के घर ना आए
न्योछावर कर दिया जिन्होंने मांग का अपने सिंदूर
जीते जी हो गए रंग जिनके जीवन से दूर 
नहीं केवल आजादी का जश्न हमें है मनाना
संरक्षण हेतु स्वतंत्रता के देश के हर नागरिक को होगा आगे आना
जाति धर्म ऊंच-नीच के भेदभाव से ऊपर उठकर देने होंगे विचारों को नए आयाम
तभी कर पाएंगे रौशन भारत का हम विश्व में नाम
साक्षरता का प्रकाश चहुं ओर होगा फैलाना
विदेशी छोड़ स्वदेशी को होगा अपनाना
निर्बल को सबल बनाने का संकल्प लेकर होगा कदम बढ़ाना

करना होगा युवा पीढ़ी को एकजुट हो देश का नेतृत्व
तभी कर पाएगा भारत अपना सशक्त प्रतिनिधित्व

तन मन प्राण की देकर आहुति जला मशाल आजादी की
वह वीर सपूत निभा गए अपना कर्तव्य
थामकर मशाल वो निभाना होगा अब हमें अपना दायित्व

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