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#वादा
कविता-( वादा तेरे मेरे बीच का)

जो वादा था तेरे मेरे बीच मे,
कभी आकर इकरार तो करते,

चंद लम्हों का इंतजार तो करते,
तुम आकर मुझसे कहते तो सही,
करके गये थे जो वादा तुम,
एक बार ही सही उसे निभातें तो सही,

कस्मे तो खायी जन्म,जन्म की,
पर एक जन्म तुम निभा न सके,
देख जमाने की मगरूर आँखें,
तुम तो अपना वादा भुला बैठे,

न शिकवा मुझे है तुझसे,
न गिला तेरे वादे से है मुझे,
मुझे शिकवा है तो खुद से,
तेरे वादे पर खुद को क़ुर्बान,

तेरे वादे से मुझे इश्क हो गया,
तेरे लिए मेरा दिल खो गया,
सम्भाला है बड़े मुश्किल से,
जो कभी तेरा हो गया था,

राते जागी आँखें मेरी,
पलके कई दिन झुकी नही,
देख रही थी राह तेरी,
पर तू कभी आया नही,

जमाना भी मुझसे रूठ गया,
वादा भी हाथों से छूट गया,
क्या था दिल का साहब,
दिल तो दिल है आखिर टूट गया।

न तुमने मुझको पहचाना,
न मै तुमको जान सकी,
तेरा दिल था पत्थर जैसा,
न मोम बना पिघला सकी।


स्वरचित
Nandini mishthi….,✍️
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#thursdaypoetry
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