आज सपनों को हकीकत बनाना चाहती हूँ

आज सपनों को हकीकत बनाना चाहती हूँ

कुछ यूँ तुम्हारे मकान को प्यार भरा मंदिर बनाकर अपनों के साथ प्यार की परछाई में रहना चाहती हूँ , 
एक पथरीली डगर है लड़कियों की जिदंगी एक अनजाना सफर भी है जिदंगी , 
छोड़कर बाबा का आंगना तुझ संग जिदंगी गुजारना चाहती हूँ |
 तुझ संग साथ चलकर अपनी हर मंजिल को पाना चाहती हूं जो ख्वाब न हुए पूरे उन्हें मुकम्मल करना चाहती हूँ | 
सुख - दुख का साथी बनकर साथ निभाना चाहती हूँ , न करूंगी कभी निराश तुम्हें ,
कदम से कदम मिलाकर राह चलना चाहती हूँ | 

लाल सुर्ख सिंदूर से मांग सजाऊँ प्रियतमा बनकर तुम्हारे दिल में रहना चाहती हूँ | 
आँच न कोई तुम पर आये ईश्वर से यही इल्तजा रखती हूँ , 
टूटे जो कभी मन के तार जोड़ने की नायाब कोशिशे करूँगी तुम्हारे साथ | 
तेरी धड़कने जो सूने कमरे को भी अपनेपन से भर देती है , 
मेरे होंठो पर सदा मुस्कुराहट लाये तेरी चाहत इसी एहसास के साथ रहना चाहती हूँ | 
मेरे लिये है गुमान से भरा रिश्ता तुम्हारा ,कुछ जाना सा और कुछ पहचाना सा तुम संग बीती याद संजोना चाहती हूँ | 

हवाओं में महसूस करती हूँ तुझे , अपनी पूजा में पूजती हूँ तुझे , 
तेरी चाहत के ही रंगों से अपना छोटा सा घरोंदा सजाना चाहती हूँ | 
मिलकर हम प्यार की बगिया बनायेगें जिस पर लगे फूलों से घर का कोना कोना महकायेगे , 
ना तुम दूर जाना ना मैं दूर जाऊंगी , मैं तुम संग चलकर एक प्यारा सा रिश्ता निभाना चाहती हूँ |
साथ  रहकर तुम्हारे आज सपनों को हकीकत बनाना चाहती हूँ | 
कुछ तुम अपनी कहना , कुछ मेरी भी सुनना ऐसे ही सुनने सुनाने में उम्र गुजारना चाहती हूँ | 

धन्यवाद !! रिंकी पांडेय                                

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