#Thursday poetry #मैं भी अंतर्यामी नहीं हूँ.....

#Thursday poetry #मैं भी अंतर्यामी नहीं हूँ.....


बिन बोले ही मैं,तुम्हारे मन की हर बात जान लेती हूँ,
क्योंकि मैं तुम्हें सच्चे दिल से प्यार जो करती हूँ ।


तुम्हारे लिए सदा तुम्हारी पसंद का भोजन बनाती हूँ,
क्योंकि मैं तुम्हें सच्चे दिल से प्यार जो करती हूँ ।


तुम्हारे मनपसंद रंग के ही कपड़े पहनती हूँ,
क्योंकि मैं तुम्हें सच्चे दिल से प्यार जो करती हूँ ।


तुम्हारे माता-पिता को अपना माता-पिता मानती हूँ ,
क्योंकि मैं तुम्हें सच्चे दिल से प्यार जो करती हूँ ।


तुम्हारे मन के अनुसार सब कुछ करती हूँ,
क्योंकि मैं तुम्हें सच्चे दिल से प्यार जो करती हूँ ।


तुम्हारी परछाई बनकर ही तुम्हारे साथ रहती हूँ,
क्योंकि मैं तुम्हें सच्चे दिल से प्यार जो करती हूँ ।


फ़िर तुम मेरी खुशी, मेरा दर्द क्यों नहीं समझ पाते?
जब पूछती हूँ तुमसे तो कहते हो,"मैं अंतर्यामी नहीं हूँ"


अरे ! तो मैं भी कौन सी अंतर्यामी हूँ ?
पर तुम्हारी आँखें, तुम्हारा मौन सब पढ़ लेती हूँ।
क्योंकि मैं तुम्हें सच्चे दिल से प्यार जो करती हूँ ।
पर शायद तुम...... ?

धन्यवाद!
रितु अग्रवाल

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