तुम जो आये जिदंगी में

तुम जो आये जिदंगी में

साल 2020 बहुत कुछ सिखा रहा है वैसे तो हर गुजरने वाले पल हमें कुछ न कुछ सीख दे ही जाते हैं वहीं 2020 कुछ ज्यादा ही सबक सिखा गया शुरूवाती दौर मे ही घर में परिस्थितियां सी बिगड़ी कि लोगों का प्यार पता चल गया कि कितनी जरूरत है रिश्तों की ! आज हम सब लोगों की बातों के पीछे भागते हैं हर वक्त सोचते हैं कि वो लोग क्या सोचेगें और हम सही निणर्य लेने से कतराते हैं जबकि जिदंगी हमारी है |

दूसरी सबसे बड़ी विपदा आई कोरोना महामारी की | जब हम सब अपने अपने घरों में कैद हो गये , अपने - अपने घरों से काम करने लगे , बच्चे स्कूल को छोड़कर ऑनलाईन पढ़ाई करने लगे | पर उन लोगों का क्या ? जो दिन भर की मजदूरी करते थे और फिर चूल्हा जलता था ? सबसे बड़ी विपत्ति की मार तो मजदूर वर्ग ने झेली है कोरोना काल में समाचारों में आने वाली खबर रोंगटे खड़े कर देती थी | यदा कदा स्थानों में फंसे लोग इस आस में कि कब लॉकडाऊन खत्म होगा कब हम अपनों से मिलेगें |                                         

जैसे तैसे चारों चरण के लॉकडाऊन खत्म हुए कि अचानक काम करने वाली घर आई कि मुझे काम दे दो घर मेंं गुजारा करना मुश्किल हो गया है तब उसे हमने काम करने के सारे तरीके व सावधानियां बताई और वह काम करने को राजी हो गई | काम को लेकर उसकी आँखों में एक अजीब सी आभायमान चमक थी जिसे देखकर मैं भी खुश थी | व मन ही मन अहसास हुआ कि कैसे गुजारे होंगे उसने वो कठिन पल | कोरोना काल ने अपने ही लोगों से कितना दूर कर दिया हमें |

जिदंगी भर हम अपने रिश्तों को संजोंने की भरपूर कोशिश करते हैं उन्हें साथ लेकर चलते हैं शायद इस आस में कि एक दिन वो हमारे काम आयेंगें पर नहीं ये शायद मेरा भ्रम ही था एक हवा के झोंके ने सबके चेहरे से नकाब हटा दिये कभी भी मुसीबत के बख्त कोई काम नहीं आता | आते हैं तो सिर्फ माता पिता और अपने पास की जमा पूंजी |

बहुत भ्रम था मुझे भी अपने रिश्तों पर | पर , वो भम्र भी उतर गया | परेशानियों की स्थति में मैं तनाव से ग्रसित होंने लगी थी लेकिन अचानक से मेरी जिदंगी में एक प्यारा सा मोड़ आया और मेरी पहचान हुई गुलाबी मंच से | अब मैं कमजोर नहीं पड़ती | पल पल परिस्थितियों से घबराती नहीं | जो भी मन में आया उन्हें कुछ इस तरह से पन्नों पर उतार कर गुलाबी मंच पर बंया कर देती हूं उसके साथ से मेरा आत्मविश्वास मजबूत हुआ | नहीं डरती मैं अब किसी के तानों सेे |

जाते जाते 2020 ने गुलाबी मंच के रूप में मुझे एक नायाब तोहफा दे गया जिस पर मैं उकेरती हूं अपने हर जस्बात और कोरोना जैसी महामारी के मानसिक तनाव से हमे काफी हद तक मुक्ति मिली शुक्रिया 2020 जो संकट की घड़ी में अपना समझने वाला प्यारा सा पिंक घराना दिया | प्यार भरे गुलाबी मैं अब नित नई नई सोच में डूबी रहती हूं |                 

#शुक्रिया2020                                                         

रिंकी पांडेय 

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