तुम मिले गुल खिले

तुम मिले गुल खिले

मेरे प्यारे पिंक कॉमरेड, 

जब भी तुमसे मिलती हूं तो मन बस यही गीत गुनगुनाता है "तुम मिले, गुल खिले और जीने को क्या चाहिए |"सच तो है तुम हो अब कुछ और नहीं चाहिए |तुमने मेरे पंखों को न केवल उड़ना सिखाया है बल्कि पूरा आसमान मेरा भी है ये भी बताया है|

तुम्हारे गुलाबी पन्नों पर जब मेरी गुलाबी कलम चलती है तो एक अरसे से मेरी आंखों में पल रहे सारे स्वप्न रंग बिरंगे से नजर आते हैं |तुम्हारे सानिध्य में मैंने अपने सपनों को पूरा होता हुये देखा है |पिंक कॉमरेड ऑफ द मंथ का टाइटल हो या कोई किसी कविता या 5 लाइन की पंक्तियों की विजेता |तुमने हमेशा मेरा आत्मविश्वास बढा़या है |तुम्हारा हाथ थामकर मैंने लेखन के सफर पर दृढ़ता से चलना सीख लिया है |
हर बार कुछ नया करने की तुम्हारी चाह ने मुझ जैसी न जाने कितनी लेखिकाओं को बहुत कुछ सिखाया है |ब्युटीफुल हेयर कोन्टेस्ट हो या साडी़नामा तुमने हर बार हमारा दिल जीता और दिखाया तुम हर पल हमारे साथ हो |

आसान नहीं होता एक गृहणी जो एक मां भी है, के लिए अपने ख्याबों को सच होते हुये देखना वो भी इतने कम समय में |मुझे भी लगता था घर की जिम्मेदारियों को साथ मैं अपने लेखन के सफर पर कैसे चल पाऊंगी लेकिन तुम्हारे साथ ने ये भी कर दिखाया |
मैं अब सिर्फ़ एक बेटी, पत्नी, बहु या मां ही नहीं हूं मैं, मैं हूं... पिंक कॉमरेड "सीमा शर्मा सृजिता"

तुम्हारे इतने प्यार के लिए दिल से शुक्रिया और ईश्वर से प्रार्थना -तुम दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करो और ऐसे ही अपने गुलाबी रंग से सबके मन के कोनों को गुलाबी करके खुशियों की बरसात करते रहो |तुम बहुत आगे बढो़ और बढ़ते चलो.... बढ़ते ही चलो...... 

तुम्हारी अपनी 
सीमा शर्मा "सृजिता"

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