तुम रोती क्यूँ नहीं ?

तुम रोती क्यूँ नहीं ?

इस आर्टिकल का शीर्षक पढ़कर आपके मन ढेरों प्रश्न जन्म ले रहें होंगे ? अख़बार , किताबें , ब्लोग्स और आर्टिकल्स में जहाँ देखो महिलाओं को खुश रहने और मुस्कराने के तरीके सिखाए जा रहे हैं ! पर मैं आपसे कहना चाहूंगी ” खुल कर रोइये ! बिलकुल सही पढ़ा आपने , अभी पिछले हफ्ते मेरे ऑफिस में साथ काम करने वाली एक लड़की ने आत्महत्या कर ली ! उस दिन मैं पूरा दिन बाहर काम और मीटिंग में व्यस्त थी , शाम को घर लौटी तो फेसबुक को स्क्रॉल करते करते एक पोस्ट ने मेरे हाथ पैरों को सुन्न कर दिया। उस लड़की की फेसबुक वॉल आज RIP के संदेशो से भरी हुई थी !

आइये थोड़ा फ़्लैश बैक में लेकर चलूँ , मैं उस लड़की का असल नाम नहीं लिखूंगी ,उसे काल्पनिक नाम दे रही हूँ ” कल्पना “! कल्पना से जब में ऑफिस में मिली थी , तब थोड़े दिन बाद बातों बातों में पता चला की वो तलाकशुदा है ! कल्पना जब भी ये बात किसी को बताती तो हमेशा एक बड़ी मुस्कान के साथ ! उसे देखकर एक पल को भी अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता की मन ही मन कुछ उसे खोखला कर रहा था।

अच्छी नौकरी , अच्छी सैलरी , और मानसिक अवसाद से भरी शादी से छुटकारा ! और क्या चाहिए खुश रहने के लिए ? हम साथ घूमने भी जाते। वो हमेशा सिर्फ मुस्कराती रहती। देखकर हम सब उसकी बहुत तारीफ करते की तुम कितने हिम्मत वाली हो , हम सब तुम्हारे साथ हैं तुम अकेली नहीं हो।

ज़िन्दगी यूँही खुशगवार गुज़र रही थी , और अचानक से कल्पना के बारे में ऐसी खबर का मिलना , अंदर तक झंकझोर गया। क्या हुआ , कैसे हुआ , कल्पना कैसे कर सकती है ,जैसे सवाल दिल और मन दोनों में पूरी ज़िंदगी के लिए घर कर जाएंगे ! वो चली गयी , एक खामोश थप्पड़ की गूंज कानों में सुनाई देती है। एक हूँक बार बार मन में उठती है ” क्यों ?

अपने मन के दुःख को अगर हम बार बार दबाने की कोशिश करेंगे तो हमारी भावनाएं धीरे धीरे घायल होना शुरू होती हैं , वो नासूर बन जाती हैं। आज के समय में किसी के साथ दुःख बांटना शायद मान सम्मान का मुद्दा बन गया है। एक मुखौटा झूठी हंसी , और खुश दिखने का शायद हमे कभी सच का सामना ना करने दे !

परिवार और दोस्तों के सामने अपने मन की बात कहने या रोने से कोई कमज़ोर नहीं होता , घुटन को कम करने का बेजोड़ तरीका है , रोइये ! अपने मन के भाव चाहे वो ख़ुशी हो या गम , खुलकर अपनों से बाँटिये। अगर आपके आस पास कोई ऐसा है जो किसी कठिन परिस्थिति से झूझ रहा है उसका हौसला बनिये। क्यों क्या कैसे जैसे प्रश्न न पूछकर ‘ बस सुनिए !

एक कल्पना चली गयी है , मैं विनती करती हूँ , अगर आप किसी भी बात को लेकर परेशान या दुखी हैं , उससे बाहर निकालने का प्रयास करिये। लिखिए ,गाइये , आंसुओं को बाहर आने दीजिये , दोस्तों से बात कीजिये। दुनिया की कोई भी परेशानी ऐसी नहीं जिसका हल न निकाला जा सके। लड़िये खुद से , खुद की कमज़ोरियों से। दुःख का अंत कीजिये , आत्महत्या किसी भी दुःख का अंत नहीं है , शायद आपके करीबी जन के लिए आपका यूँ गुमसुम चले जाना ,ज़िंदगी भर का नासूर ज़रूर बन जाए !

अपना ख्याल रखिये।

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