तुम ताउम्र याद रहोगे २०२०

तुम ताउम्र याद रहोगे २०२०

प्यारे २०२०,

तुम्हारे जाने में बस अब कुछ सप्ताह ही रह गये है। तुम इस सदी के बीसवें साल जब तुम्हारा आगमन होने वाला था ,तब हमारी बहुप्रतीक्षित आंखें तुम्हारे स्वागत में पलक फावड़े बिछाये हुए थे । तुम आये तुम्हारा स्वागत भी हमने आने वाले हर नए साल की तरह हर्षोल्लास से किया ।ना जाने कितने सपने हमने तुम्हारे साथ बुन डाले ।

इन सपनों को हकीकत की धरातल जब तक उतारते तब तक ना जाने उन सपनों को,उन स्वप्निल खुशियों को शायद अपनी ही नजर लग गई।तुम्हारे आए अभी कुछ दिन ही हुए थे अभी तुम्हारे आने की खुशियों में अभी हम लिप्त ही थे कि एक अनजानी दहशत ने पूरे विश्व में जैसे तहलका मचा दिया।एक अनदेखा खौफ सभी के जीवन में बिन बुलाए मेहमान की तरह चला आया। हालांकि यह अनदेखा खौफ जिसे हम कोविड-१९ के रूप में जानते हैं जिसने दस्तक तो २०१९ के अक्टुबर नवम्बर में दी थी पर उसने पूरे विश्व में अपने पैर तुम्हारे आने के साथ ही फैलाने शुरू कर दिया ।

इसने पूरे विश्व में महामारी का रूप ले लिया और साथ ही मौत का ऐसा तांडव मचाया कि सारी विश्व कि चिकित्सा प्रणाली के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई।यह महामारी इतनी तेजी से फैलने लगी कि‌ बाध्य होकर पूरे विश्व की सरकारों ने अपने अपने देश में लॉकडाउन लगा दिया।

सारी विश्व की जनता अपने अपने घरों में कैद हो गई।ये तो इस साल आने वाली इस महामारी का सिर्फ एक पक्ष ही था । इसका दूसरा पक्ष भी था जिसे हम उस महामारी की आपाधापी में नहीं समझ सके लेकिन अब जब तुम्हारे जाने का समय आ गया तो पूरे साल का जब हम आकलन करने बैठते हैं तो वो लॉकडाउन जिसमें हम भयभीत से घरो में दुबके परे थे, वही हमारे जीवन का, तुम्हारे पूरे साल के स्वर्णिम दिन थे।जब हम बाहरी दुनिया से कट जरूर गए थे पर अपनो के बेहद करीब आ गए ।

तुम हमें कम संसाधनों में भी बेहतरीन जीवन जीने के तरीके को सिखला गए।हर रिश्ता जो बाहरी दुनिया के आपाधापी में दम तोड़ रहा था वो लॉकडाउन की संजीवनी में लहलहा उठा । जो हम समझते थे बिना घरेलू सहायकों के हमारे जीवन का चक्का जाम हो जायगा तुमने हम उनके सहयोग के बिना जीना सिखला दिया। तुम्हारा यह साल प्रकृति के लिए भी स्वर्णिम समय था क्योंकि लॉकडाउन होने से प्रदुषण स्तर भी घट गया । नदियों का जलस्तर जो कल कारखानों की वजह से प्रदुषित हो गई थी वह भी स्वच्छ निर्मल हो गई। प्रकृति के सारे जीव-जंतु जो कि हम मनुष्यों के भय से एक प्रकार से बंदी जीवन ही जी रहे थे वे अब स्वच्छंद बिना भय के इधर उधर घूम रहे थे।सागर तट पे भी समुद्री जीव जन्तु मनुष्य के तट पर ना होने से बेखौफ तट पर अपना बसेरा बसा रहे थे। जानते हो तुमने हमें प्रकृति का महत्व भी समझाया यह भी जता दिया कि जो हम मनुष्य अपने आप को इस दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्राणी घोषित किए बैठे हुए हैं हम प्रकृति के समझ नगण्य है प्रकृति जब चाहे हमें हमारी सारी उद्दंडताओ का दंड दे सकती है।

ऐ जाते हुए २०२० के लम्हें हम तुम्हें ताउम्र याद रखेंगे क्योंकि तुमने इस एक साल की अवधि ना जाने कितने ही चीजों के चाहे वह आपसी रिश्ते हो या प्रकृति से हमारा सम्पर्क सभी का महत्व को समझा दिया ।इन सभी बातों के लिए तुम्हारा धन्यवाद।

जयश्री शर्मा

मौलिक एवं स्वरचित

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