तुमने लिखना सिखाया

तुमने लिखना सिखाया

मेरे प्यारे सखियों से बना मेरा परिवार मेरे पिंक कॉमरेड,

हर पल तुम्हारे साथ जिया। तुम्हारे साथ हँसी, तुम्हारे साथ रोई, पर तुमने मेरी हिम्मत बढ़ाई ।दोबारा कभी मेरी आँखों में आँसू नहीं आने दिया ।यह साल बड़ा तनावपूर्ण रहा ।सभी खुद के घर में ही बंद से हो गए ।लगा जैसे  घर में पहचान भी खो सी गई ।तुमने नए-नए कॉन्टेस्ट और विचारों द्वारा मेरे जीवन में उदासी नहीं आने दी ।मेरी पहचान को  बनाए रखने में मेरी मदद की ।बेटी को लिखे पत्र में मुझे तुम्हारी तरफ से प्यारा सा उपहार मिला।दिवाली पर जब  जब मैंने उपहार मिले कैंडल को जलाया तो लगा यह रोशनी मेरी पहचान को  घर में बिखेर  रही है जो मुझे इस मंच से मिली ।

कई बार हम लिखना चाहते हैं पर हम समझ नहीं पाते हैं क्या लिखे? तुमने नारी सशक्तिकरण और कई महत्वपूर्ण विषयों पर  जो आसान हो ,हमें लिखने का मौका दिया। मेरी उम्मीदों को एक उडान मिली। पहली बार जब इस मंच से जुड़ी थोड़ा डर लगा। पता नहीं यह मुझे स्वीकार करेगा या नहीं ।पर इस मंच से मुझे इतना प्यार मिला कि अब एक दिन भी ना मिलो तो मुझे कमी सी लगती है। ऐसा लगता है कुछ अधूरा है।जब कोई पूछता  है क्या मिला तुम्हें इस मंच से ।मै वे सारे सर्टिफिकेट उन्हें दिखाती हूँ जो मुझे तुमसे मिले।मैंने कभी कविता नहीं लिखी ।या कहे तो मुझे लिखना नहीं आता है।पर इस मंच से हिम्मत मिली तो मैंने कविता लिखी जिसे आपलोगों का बहुत प्यार मिला।तुमने मुझे लिखना सिखाया।

अब तो यही कहती हूँ, जिन्दगी बन गए हो तुम'

तुम्हारी दोस्त,

मधु

डाॅ मधु कश्यप ,

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