वज़ूद खिलौनों का

वज़ूद खिलौनों का

“हैल्लो शुभी कैसी हो..हो गयी सेटिंग सामान की..तो यार इस संडे आओ न फैमिली के साथ..साथ में लंच करेंगे..पक्का ना.. ठीक है..मैं इंतज़ार करूँगी..बाय”और नीता ने फोन रख दिया।दरअसल शुभी नीता की कजिन थी..और अभी एक हफ्ता ही हुआ था उन्हें इस शहर में आये हुए।

संडे के दिन शुभी ने एक बैग में पांच माह की विशु के डायपर और दूध की बोटल पैक करी और पति संग नीता के घर को निकल गयी।बहुत ही सुंदर तरीके से नीता ने घर सजाया था।बेडरूम से लेकर ड्राइंग रूम तक खूबसूरत टेडी बियर और डॉल्स करीने से रखी हुई थी।जबकि उसके पास चार वर्षीय बिटिया भी थी।लंच करने के बाद मैंने नीता से पूछ ही लिया, “यार तूने तो घर को पूरा बच्चों की दुनियाँ में बदल दिया है।तेरी बेटी तो खूब खेलती होगी इन खिलौनों से और मानना पड़ेगा कि सारे खिलौने कितने सम्भाल के रखे हुए है उसने”।

इसी दौरान वो बर्तन सम्हाल रही थी कि मैं उसकी बेटी से बात करने लगी”बेटू आपका इन टेडी में कौन बेस्ट फ्रेंड है”?वो बड़ी ही मासूमियत से बोली”मासी ये तो सजाने के टेडी हैं,मेरा फ्रेंड तो छोटू है”और वो दौड़ के एक छोटा टेडी ले आयी।

मैंने पूछा,”बेटा आप इन बड़े टेडी से नहीं खेलते क्या”?”नहीं मौसी मम्मा डाँटती हैं उनसे खेलने पर,मैं तो बस छोटू संग खेलती हूँ”।बच्चे ने इतनी मासूमियत से जवाब दिया कि मेरी भी समझ मे आ गया कि सारे खिलौने इतने व्यवस्थित क्यों थे ।

खैर मैं तो लौट के घर आ गयी पर नीता की सोच पर मुझे तरस आ रहा था कि जब बच्चा खिलौनों से खेल नहीं सकता तो फिर वे खाली दिखावे के लिए क्यों खरीदे गए हैं?जब बच्चा अपने ही घर में सामने रखे खिलौनों से नहीं खेल सकता तो फिर उन खिलौनों का वजूद ही क्या रहा।दोस्तों बचपन हमेशा नहीं रहता है ग्यारह बारह वर्ष बाद ही बच्चे खिलौनों से खेलना छोड़ देते हैं।तो क्यों बच्चों को इनके खेल से वंचित करना है?आप बच्चे के लिए सीमित खिलौने ही खरीदिये।याद रखिये खिलौने सजावटी सामान नहीं है तभी तो वे खेलने के लिए बने हैं।आप खिलौना शब्द को टटोल कर देखिए।खिलौना यानी खेलने की वस्तु।इन खिलौनों को सज़ा कर बेशक आप वाह वाही लूट सकती हैं।

पर बिना खेले इनका औचित्य नहीं हो सकता।अभी कुछ लोग कहते हैं कि इतना महंगा खिलौना लिया और बच्चे ने एक हफ्ता नहीं चलाया, पर बहनों अच्छा है न बच्चे ने उससे खेला तो सही।अब अगर आप उसे शोकेश में सजा देंगीं तभी वो ताउम्र सलामत रहेगा।अच्छा होगा आप कम खिलौने खरीदिये और बच्चे को उसका महत्व बताइये और उसके रखरखाव की ज़िम्मेदारी का अहसास करवाइए।तभी इन खिलौनों का औचित्य रहेगा।धन्यवाद।

आपकी स्नेह (सर्वाधिकार सुरक्षित)..

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