वसीयत बनाना बेहद जरूरी - Gyani Vaani

वसीयत बनाना बेहद जरूरी - Gyani Vaani

कई बार हम सुनते या पढ़ते है कि कोई गतिविधि न होने की वजह से बैंकों में कुछ लाॅकर सालों से बंद पड़े होते है। इसका मतलब जिनका लाॅकर है उस व्यक्ति ने अपनी मिल्कियत की वसीयत नहीं बनाई। वसीयत न होने की वजह से परिवार वालें उस लाॅकर को हाथ तक नहीं लगा सकते। और कई बार परिवारों में वसीयत न होने की वजह से संपत्ति को लेकर विवाद और बंटवारे भीए होते हैं।


वसीयत बनाना इसलिए जरुरी है क्योंकि व्यक्ति की मृत्यु के बाद यह दस्तावेज सुनिश्चित करता है कि उसकी संपत्ति सुरक्षित हाथों में जाएगी। और परिवार वालों को भी वो संपत्ति हासिल करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। एक साफ़ और अच्छी लिखी वसीयत उसके असली वारिस को आपसी झगड़े से बचाती है।


वसीयत तैयार करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दस्तावेज हमेशा व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके द्वारा छोड़ी गई सम्पत्ति की एक इन्वेंटरी के रूप में कार्य करती है। एक स्पष्ट और अच्छी तरह से लिखी वसीयत व्यक्ति के प्राकृतिक वारिसों में झगड़ा होने से बचाती है। और अगर एक व्यक्ति अपने धन को अपने प्राकृतिक वारिसों के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति को देना चाहता है तो वसीयत का महत्व बढ़ जाता है।


मानसिक तौर पर स्वस्थ कोई भी वयस्क व्यक्ति वसीयत बना सकता है। अंधे और बहरे व्यक्ति वसीयत बना सकते हैं। अगर वे अपने कार्यों के परिणामों और उनके कानूनी परिणामों को समझते हों। एक सामान्य रूप से पागल आदमी भी वसीयत तैयार कर सकता है लेकिन केवल तभी जब वह बुद्धि से सोचने योग्य हो जाए। लेकिन अगर एक व्यक्ति यह नहीं जानता कि वह क्या करने जा रहा है, तो वह वसीयत तैयार नहीं कर सकता।


वसीयत को एक सादे कागज पर तैयार किया जा सकता है और अगर उसके नीचे हस्ताक्षर किए गए हैं तो यह पूरी तरह से वैद्य होगी अर्थात इसे कानूनी रूप से रजिस्ट्रड करवाना अनिवार्य नहीं है। लेकिन इसकी वास्तविकता पर संदेहों से बचने के लिए एक व्यक्ति को इसे रजिस्ट्रड करवा लेना चाहिए।


अगर एक व्यक्ति अपनी वसीयत को रजिस्ट्रड करवाना चाहता है तो उसे गवाहों के साथ सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय जाना होगा। विभिन्न जिलों के लिए सब-रजिस्ट्रार होते हैं और व्यक्ति को उस रजिस्ट्रार का पता लगाना होगा जो वसीयत को रजिस्ट्रड करने में सहायता करेगा।


रजिस्ट्रड करवाने के बाद वसीयत एक शक्तिशाली कानूनी प्रमाण बन जाता है। इसमें यह लिखना पड़ता है कि वसीयत बनाने वाला व्यक्ति अपनी इच्छा से ऐसा कर रहा है और उसकी बुद्धि स्वस्थ है। वसीयत वसीयतकर्ता के हस्ताक्षर होने चाहिए और इसे कम से कम दो गवाहों द्वारा प्रमाणित होना चाहिए। वसीयत पर कोई स्टैम्प ड्युटी भी नहीं लगती, इसलिए इसे स्टैम्प पेपर लिखना जरूरी नहीं है।


एक वसीयत को अपनी इच्छा के अनुसार या बिना इच्छा के बदला जा सकता है। बिना इच्छा के विखंडन कानूनी प्रक्रिया द्वारा किया जा सकता है। यदि वसीयतकर्ता विवाह कर लेता है तो उसकी वसीयत अपने आप विखंडित हो जाती है। विखंडन न केवल पहली बार विवाह से हो जाता है बल्कि उसके बाद किए जाने वाले विवाहों से भी हो जाता है। व्यक्ति अपनी इच्छा से जितनी बार चाहे वसीयतें बदल सकता है, लेकिन उसकी मृत्यु से पहले तैयार की गई उसकी अंतिम वसीयत लागू होती है।


तो अपनी संपत्ति की वसीयत बनाना बेहद जरूरी है।


(भावना ठाकर, बेंगुलूरु) #भावु

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