व्यवहार बराबरी का जीवनसाथी के अपनों के साथ- Blog post by Priyanka Saxena

व्यवहार बराबरी का जीवनसाथी के अपनों के साथ- Blog post by Priyanka Saxena

शनाया और‌ मोहित की शादी के बाद दोनों अपनी जाॅब के कारण थोड़े दिन मोहित के घर रहने के बाद मुंबई चले गए। शनाया एक एम एन सी में फाइनेंशियल कंसल्टेंट है और मोहित टेलीकम्युनिकेशन कंपनी में मार्केटिंग हेड है।

मोहित के माता पिता लखनऊ में रहते हैं जहां उनका पुश्तैनी घर है। मोहित के पिता पीडब्ल्यूडी में सर्विस इंजीनियर हैं, मोहित की माताजी पब्लिक स्कूल में अध्यापिका हैं।


शनाया के घर में उसके बड़े भाई, भाभी और माता-पिता हैं। पिताजी सरकारी नौकरी में हैं, माताजी हाउसवाइफ हैं। वे लोग भोपाल रहते हैं।


"शनाया, माॅ॑ और पापा आ रहे हैं तो तुम कुछ दिन के लिए छुट्टी ले लो। उनका ध्यान रखो, उन्हें अच्छा लगेगा।" मोहित ने कहा


" हां, ठीक कह रहे हो, मैंने तो पहले से ही एप्लीकेशन दे दी है। खूब घूमेंगे, बड़ा मज़ा आएगा। साथ ही माॅ॑ और पापा जी का फुल बाॅडी चेकअप भी करवा लेंगे।" शनाया ने बताया


"ये तो तुमने बड़ी अच्छी बात सोची।" मोहित की आवाज़ से ही हर्ष झलक रहा था


माॅ॑ पापा जितने दिन रहे शनाया ने बहुत अच्छे से ध्यान रखा। ऑफिस से कुछ दिन छुट्टी ले ली और कुछ दिन वर्क फ्रॉम होम ले लिया, यदि कभी जाना हुआ तो जल्दी घर आ गई। उन दोनों का फुल बाॅडी चेकअप करवाया, ईश्वर की कृपा से कुछ निकला नहीं। माॅ॑ पापा खुश होकर गए।


थोड़े दिन बाद उनके पास मोहित के चाचाजी और चाचीजी आए। शनाया और मोहित ने उनका ख्याल रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। शनाया ने ऑफिस से छुट्टी लेकर उन्हें घुमाया, शाॅपिंग करवाई।


शनाया और मोहित मुंबई में रहते हैं तो स्वाभाविक है, ससुराल पक्ष से कोई ना कोई आता रहता है और वह यथासंभव उनका स्वागत करती है। जरूरत पड़ने पर छुट्टियां लेती है, घुमाती-फिराती है।


दो महीने बाद..

" शनाया, आज मेरा जिगरी दोस्त ललित चार साल बाद मुझसे मिलने अपने घर आ रहा है। मैंने कल डिनर पर फैमिली के साथ बुला लिया। ठीक है ना?"

"हां, बहुत सुना है ललित के बारे में तुमसे, कल मिलना भी हो जाएगा। ऐसा करते हैं,मैं खाने के लिए जरूरी सामान की लिस्ट बना लेती हूॅ॑। सुबह थोड़ा बनाकर चली जाउंगी फिर हाॅफ डे लीव‌ ले लूंगी।" शनाया ने खुश होकर कहा


अगले दिन शनाया ने जमकर खातिरदारी की, ललित उसकी पत्नी अक्षिता व डेढ़ साल के हनी से मिलकर समय कब निकल गया, पता ही न चला। उन दोनों को ललित और‌ अक्षिता ने मुम्बई आने का निमंत्रण दिया।


ऐसे ही हंसी, खुशी और प्यार से शनाया और मोहित की लाइफ मस्ती में गुजर रही है। शादी को एक साल हुआ है तो प्यार दुलार भी है, हालांकि उनका विवाह अरेंज्ड मैरिज है पर लव बर्ड्स ही लगते हैं सबको वो दोनों।


रक्षाबंधन का पर्व कुछ ही दिनों में आने वाला है। मोहित की कोई बहन नहीं है, इकलौता बेटा है। शनाया के बड़े भाई शोमिल और भाभी रक्षा हैं। रक्षाबंधन पर कभी ऐसा नहीं हुआ कि उसने भैया को राखी न बांधी हो। इस बार जाॅब में वर्कलोड ज्यादा होने की बात सुनकर शोमिल ने मुंबई आने का कार्यक्रम बना लिया। अब भोपाल से मुंबई आ ही रहें हैं तो शनाया ने एक हफ़्ते के लिए आने का भैया से आग्रह किया परंतु भैया को चार दिन की ही छुट्टी मिल पाई।


रक्षाबंधन वाले दिन भैया व भाभी आने वाले हैं, शनाया ने मोहित को बताया तो उसने कुछ खास उत्साह नहीं दिखाया। शनाया ने नोटिस किया कि अब मोहित शाम को लेट आने‌ लगा। उसने पूछा तो मोहित ने कहा कि काम ज्यादा है।


शनाया ने भैया भाभी के आने की तैयारी अकेले ही कर ली। वह जब भी कुछ कहती कि मेन्यू क्या रखेंगे या कहां घूमने जाएंगे तो मोहित निर्विकार भाव से कहता कि शनाया ही देख ले और वो ही सामान‌ ले आए एवं वो प्रोग्राम बना लें‌ कि कहां घुमाने ले जाना है उन लोगों को।


रक्षाबंधन वाले दिन सुबह-सुबह शनाया के भैया भाभी आ गए। मोहित थोड़ी देर बाद काम ज्यादा है, बोलकर रक्षाबंधन वाले दिन अपने रूम में काम करता रहा। अगले दिन ऑफिस चला गया। शाम को भी लेट आया, एक दो बार दिन में शनाया को फोन किया करता था। वो भी भूल गया, शनाया ने ही कर लिया फोन।


केवल‌ दो दिन बाहर जा पाए, जिसमें मोहित एक ही बार साथ गया बाकी काम की व्यस्तता बताकर ऑफिस चला गया। शनाया ने वर्क फ्रॉम होम ले लिया था। भैया भाभी के साथ उसे अच्छा लग रहा था पर एक फीलिंग शनाया के मन में आ गई कि मोहित समय नहीं निकाल पाया उसके भाई भाभी के लिए। शनाया तो मोहित के घर से किसी के भी आने पर चाहें वे कितनी दूर के रिश्तेदार हों, बड़े लगाव व अपनेपन से पेश आती है।


भैया भाभी चार दिन रहकर चले गए। मोहित का वर्क लोड शायद चार दिनों के लिए ही था, अब वह घर समय से आने लगा।


कुछ वक्त के बाद मोहित के मामा की बेटी के सपरिवार आने का हुआ। मोहित ने पूरे उत्साह से तैयारी करवाई , बताया कि उसकी ममेरी बहन को क्या पसंद है, कहां घूमेंगे आदि आदि...


शनाया ने अबकी बार भी अच्छी तरह से सबकुछ मैनेज किया।


ऐसे ही वक्त गुजरता गया, कुछ महीनों बाद...


एक दिन शनाया को अपनी सी एफ ए की बैचमेट व हाॅस्टल की रूममेट ज्योति के आने का फोन आया। ज्योति का मुंबई में ऑफिशियल वर्क है , वह तीन दिन के लिए आने वाली है। कंपनी ने फाइव स्टार होटल में स्टे का अरेंजमेंट किया है। ज्योति से फोन पर बात कर शनाया ने एक रात का डिनर अपने यहां फिक्स कर‌ लिया।


खुशी खुशी उसने मोहित को यह बात बताई तो मोहित बोला कि उसकी दोस्त से मिलकर वह क्या करेगा? शनाया ज्योति से खुद ही मिल लें, डिनर घर पर है तो वह ऑफिस से लेट आ जाएगा।


ज्योति के आने में केवल एक दिन बाकी था। शनाया ने सोचा अब बहुत हो गया मोहित से बात करनी ही पड़ेगी।


शनाया ने डिनर के बाद मोहित से बोला कि उसे कुछ जरूरी बातें करनी हैं।


मोहित ने प्यार से पूछा," शनाया, क्या बात है, कोई परेशानी है?"


शनाया ने कहा," मोहित, जब जब तुम्हारे घर से कोई भी आया मैंने सबकी अच्छी तरह से आवभगत की।कभी शिकायत का मौका नहीं दिया। यहां तक कि दूर दराज का भी कोई आया तो उसको पूछा। तुम्हारे दोस्तों का भी खाना पीना करती रहती हूॅ॑। तुम भी बढ़-चढ़कर तैयारियां करवाते हो।

हां, यहां मैं मम्मी जी और पापाजी की बात नहीं कर रही हूॅ॑, उनका घर है यह।"


मोहित ने लाड़ से कहा," बिल्कुल सही कह रही हो, पर ये सब बातें क्यों? मैंने कब इंकार किया इस बात से?"


शनाया ने आगे कहा," मोहित, फिर मेरे घरवालों के साथ अलग बर्ताव क्यों? मेरे भाई भाभी के लिए तुम्हारे पास समय नहीं था। मेरी बेस्टी आ रही है, तुम्हें मिलना तक गवारा नहीं? मैं क्या तुम्हारे दोस्तों या उनकी पत्नियों को पहले से जानती थी, नहीं ना? फिर भी मिली सबसे और तुमने भैया-भाभी के आने पर काम ज्यादा होने का बहाना बनाया और अब तुम ज्योति से मिलना भी नहीं चाहते....."

ऐसा कहते कहते शनाया रुआंसी हो गई।


मोहित को अब तक अपनी गलती का एहसास भली प्रकार से हो चुका था।


उसने अपने कान पकड़कर शनाया से क‌हा," शनाया , भारी गलती हो गई मुझसे। आगे से नहीं होगा ऐसा, मैं सबका समान रूप से स्वागत करूंगा। अब तो माफ़ कर दो। मैं अवश्य ज्योति से मिलूंगा। आज ही भैया भाभी को यहां आने के लिए इन्वाइट करता हूॅ॑। हम दोनों बराबर हैं और मैं इस बात का ध्यान रखूंगा कि मेरे किसी बर्ताव के कारण अनजाने में ही सही मैं तुम्हें ठेस न पहुंचा दूं। हम दोनों ज़िन्दगी के सफ़र में एक दूसरे के साथ समानता का व्यवहार सिर्फ बोलने के लिए नहीं बल्कि वास्तविकता में कर समाज के लिए उदाहरण प्रस्तुत करेंगे।"


शनाया नम हुई आंखों से ही हंस पड़ी, बोली" मोहित, तुम मेरी बात समझ गए। हम पत्नियां अपने घरवालों और दोस्तों के लिए आदर एवम् सम्मान पतियों से चाहती हैं। आज तुमने अपनी गलती मान कर और हम दोनों के एक दूसरे के घरवालों और मित्रों के प्रति समान‌ व्यवहार की बात कर दिल से खुशी पहुंचाई है। "


दोनों खिलखिला कर हंस पड़े।

मोहित बोला," इसी बात पर काॅफी हो जाए, मैं फटाफट काॅफी लेकर आया।"


दोस्तों, पत्नियां के दिल तक पहुंचने का सीधा सरल‌ रास्ता है- उनको और उनके अपनों को बराबर का आदर व सम्मान देना। समानता की शुरुआत घर से करके देखिए तो जरा , जीवन में नये कुसुम खिल उठेंगे। बात करने से भी परेशानी और मुद्दे हल होते हैं, कभी खुलकर बात तो कीजिए!


धन्यवाद

-प्रियंका सक्सेना

#WomenEqualityDay

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